गिरिराज किशोर  

गिरिराज किशोर
गिरिराज किशोर
पूरा नाम गिरिराज किशोर
जन्म 8 जुलाई, 1937
जन्म भूमि मुजफ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र साहित्य
मुख्य रचनाएँ 'ढाई घर', 'पहला गिरमिटिया', 'शहर-दर-शहर', 'पेपरवेट', 'दावेदार', 'यातनाघर', 'जुगलबन्दी' आदि।
भाषा हिन्दी
विद्यालय 'समाज विज्ञान संस्थान', आगरा
शिक्षा 'मास्टर ऑफ़ सोशल वर्क',
पुरस्कार-उपाधि 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' (1992), 'पद्मश्री' (2007), 'व्यास सम्मान' (2000), 'वीरसिंह देव पुरस्कार', 'भारतेन्दु पुरस्कार' आदि।
प्रसिद्धि उपन्यासकार, कहानीकार, नाटककार और आलोचक।
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी वर्ष 1998 से 1999 तक संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ने गिरिराज किशोर को 'एमेरिट्स फैलोशिप' दी थी। 2002 में 'छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर द्वारा डी.लिट. की मानद उपाधि दी गयी।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

गिरिराज किशोर (अंग्रेज़ी: Giriraj Kishore; जन्म- 8 जुलाई, 1937, मुजफ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश) हिन्दी के प्रसिद्ध उपन्यासकार होने के साथ-साथ एक सशक्त कथाकार, नाटककार और आलोचक हैं। एक कहानीकार के रूप में भी इन्होंने पर्याप्त ख्याति अर्जित की है। गिरिराज किशोर के सम-सामयिक विषयों पर विचारोत्तेजक निबंध विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से प्रकाशित होते रहे हैं। आपने बालकों के लिए भी अनेक लेख लिखे हैं। इनका उपन्यास 'ढाई घर' अत्यन्त लोकप्रिय हुआ था। वर्ष 1991 में प्रकाशित इस कृति को 1992 में ही 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' से सम्मानित कर दिया गया था। गिरिराज किशोर द्वारा लिखा गया 'पहला गिरमिटिया' नामक उपन्यास महात्मा गाँधी के अफ़्रीका प्रवास पर आधारित था, जिसने इन्हें विशेष पहचान दिलाई।

शिक्षा व कार्यक्षेत्र

गिरिराज किशोर का जन्म 8 जुलाई, 1937 को उत्तर प्रदेश के मुजफ़्फ़रनगर में हुआ था। अपनी शिक्षा के अंतर्गत उन्होंने 'मास्टर ऑफ़ सोशल वर्क' की डिग्री 1960 में 'समाज विज्ञान संस्थान', आगरा से प्राप्त की थी। गिरिराज किशोर 1960 से 1964 तक उत्तर प्रदेश सरकार में सेवायोजन अधिकारी व प्रोबेशन अधिकारी भी रहे थे। 1964 से 1966 तक इलाहाबाद में रहकर स्वतन्त्र लेखन किया। फिर जुलाई, 1966 से 1975 तक 'कानपुर विश्वविद्यालय' में सहायक और उप-कुलसचिव के पद पर सेवारत रहे। आई.आई.टी. कानपुर में 1975 से 1983 तक रजिस्ट्रार के पद पर रहे और वहाँ से कुलसचिव के पद से उन्होंने अवकाश ग्रहण किया। वर्ष 1983 से 1997 तक 'रचनात्मक लेखन एवं प्रकाशन केन्द्र' के अध्यक्ष रहे। गिरिराज किशोर साहित्य अकादमी, नई दिल्ली की कार्यकारिणी के भी सदस्य रहे। रचनात्मक लेखन केन्द्र उनके द्वारा ही स्थापित किया गया था। आप हिन्दी सलाहकार समिति, रेलवे बोर्ड के सदस्य भी रहे।[1]

फैलोशिप

वर्ष 1998 से 1999 तक संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ने गिरिराज किशोर को 'एमेरिट्स फैलोशिप' दी। 2002 में 'छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर द्वारा डी.लिट. की मानद् उपाधि दी गयी। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में मई, 1999-2001 तक फैलो रहे।[2]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. गिरिराज किशोर (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 12 जुलाई, 2011।
  2. गिरिराज किशोर, संस्थापक सदस्य (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 12 जुलाई, 2011।
  3. गिरिराज किशोर जी से बातचीत (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 12जुलाई, 2011।
  4. गिरिराज किशोर, संस्थापक सदस्य (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 12 जुलाई, 2011।

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