इन्दु प्रकाश पाण्डेय  

इन्दु प्रकाश पाण्डेय
डॉ. इन्दु प्रकाश पाण्डेय
पूरा नाम डॉ. इन्दु प्रकाश पाण्डेय
जन्म 4 अगस्त, 1924
जन्म भूमि गेगासों शिवपुरी, रायबरेली, उत्तर प्रदेश
अभिभावक पं. शम्‍भू रतन पाण्‍डेय और शुभद्रा पाण्‍डेय
पति/पत्नी हाइडी पांडेय
संतान पुत्र- पुरुषोत्‍तम, कैलाश और अविनाश
कर्म-क्षेत्र स्वतंत्रता सेनानी, प्राध्‍यापक, साहित्यकार
मुख्य रचनाएँ ‘अवधी लोकगीत और परम्‍परा’, ‘अवधी लोकगीत और परम्‍परा’, ‘अवध की लोक कथाएँ ’, ‘ख़ून का व्‍यापारी’ , ‘मँझधार की बाँहें’, ‘रीज़नलिज़्म इन हिन्‍दी नॉवेल’ आदि
भाषा हिन्‍दी, अंग्रेज़ी, ब्रजभाषा, भोजपुरी, उर्दू, गुजराती और मराठी
विद्यालय इलाहाबाद विश्वविद्यालय
शिक्षा एम. ए. (हिन्‍दी साहित्‍य)
पुरस्कार-उपाधि डी. लिट्.
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी इन्दु प्रकाश पाण्डेय जर्मनी के फ्रैंकफुर्त नगर में स्थित जॉन वौल्‍फ़गॉग गोएटे विश्‍वविद्यालय के भारतीय भाषा विभाग से 1989 में अवकाश प्राप्‍त प्राध्‍यापक हैं।
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डॉ. इन्दु प्रकाश पाण्डेय (अंग्रेज़ी: Dr. Indu Prakash Pandey, जन्म: 4 अगस्त, 1924) हिन्दी के समकालीन साहित्यकार हैं। इन्दु प्रकाश पाण्डेय जर्मनी के फ्रैंकफुर्त नगर में स्थित जॉन वौल्‍फ़गॉग गोएटे विश्‍वविद्यालय के भारतीय भाषा विभाग से 1989 में अवकाश प्राप्‍त प्राध्‍यापक हैं। 90 वर्ष की आयु में भी डॉ. पाण्‍डेय की सक्रियता में कोई कमी नहीं है। वर्तमान में वे ‘नागरी प्रचारिणी सभा’ तथा ‘भारतीय पी.ई.एन.’ के स्‍थाई सदस्‍य हैं।

जीवन परिचय

डॉ. इन्‍दु प्रकाश पाण्‍डेय का जन्‍म 4 अगस्त, 1924 को उत्तर प्रदेश के ज़िला रायबरेली में ग्राम गेगासों शिवपुरी के पं. शम्‍भू रतन पाण्‍डेय तथा शुभद्रा पाण्‍डेय के घर हुआ। गाँव की पाठशाला से प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्‍त करने के बाद बालक इन्‍दु प्रकाश परिवार के साथ कासगंज, अजमेर, माउंट आबू और रायबरेली रहे और इन्‍हीं स्‍थानों पर रह कर माध्‍यमिक शिक्षा प्राप्‍त की। रायबरेली से 1943 में हाईस्‍कूल की परीक्षा उत्‍तीर्ण की। इसी साल महात्मा गाँधी द्वारा शुरू किए गए भारत छोड़ो आन्दोलन में सक्रिय भाग लिया और गिरफ्तार होकर जेल में रहे। यही वर्ष इन्‍दु प्रकाश के जीवन में भारी मोड़ लाने वाला वर्ष था, जब परिवार के दबाब में उन्‍हें अनिच्‍छापूर्वक विवाह करना पडा। हाइडी पांडेय ने धर्मपत्‍नी के रूप में उनके जीवन में प्रवेश लिया जो कालान्‍तर में उनके तीन बेटों पुरुषोत्‍तम, कैलाश और अविनाश की माँ बनीं। विवाह के बाद इन्‍दुजी इण्‍टरमीडिएट की शिक्षा के लिए कानपुर गए और बी.एन.एस.डी. कॉलेज से 1945 में इण्‍टरमीडिएट की परीक्षा पास की। फिर वे उच्‍च शिक्षा के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रविष्‍ट हुए। वहाँ से 1947 में बी.ए. की उपाधि हिन्‍दीअंग्रेज़ी साहित्य तथा राजनीति शास्‍त्र विषय लेकर प्राप्‍त की। 1949 में उन्‍होंने इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय से ही हिन्‍दी साहित्‍य में एम. ए. की उपाधि प्राप्‍त की।

गाँधीजी का सान्निध्य

तत्‍कालीन स्‍वतंत्रता संग्राम के महानायक महात्मा गाँधी से अत्‍यधिक प्रभावित होने के कारण इन्‍दु प्रकाश 1946-47 में गाँधी आश्रम सेवापुरी, वाराणसी में रहे और वहाँ जे. सी. कुमारप्‍पा से उन्‍होंने ‘गाँधियन अर्थशास्‍त्र सीखा। प्रो. धवन ने उन्‍हें ‘गाँधियन राजनीति दर्शन’ का ज्ञान प्राप्‍त कराया। यह वही समय था जब इन्‍दु प्रकाश आचार्य जे. बी. कृपलानी, धीरेन्‍द्र भाई मजूमदार और प्रो. आसरानी के सम्‍पर्क में भी आए। फिर इलाहाबाद वापस आकर ‘रचनात्‍मक परिषद ’ की स्‍थापना की और गाँधीवादी रीति से जीवनयापन को लक्ष्‍य बनाया। तत्‍कालीन सभी महत्‍वपूर्ण गाँधीवादी विचारक नेता उस परिषद् में आए और उन लोगों ने परिषद् के सदस्‍यों के साथ चर्खा कताई और विचार-विमर्श किए। उन्‍हीं दिनों इन्‍दुजी ने भाई सालिगराम से प्रौढ़ शिक्षा का प्रशिक्षण लिया और अनेक गाँवों में प्रौढ़ शिक्षा की कक्षाएँ भी चलाईं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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