गिजुभाई बधेका  

गिजुभाई बधेका
गीजू भाई
पूरा नाम गिरिजा शंकर बधेका
अन्य नाम गिजुभाई बधेका, मोछाई माँ
जन्म 15 नवम्बर, 1885
जन्म भूमि चित्तल, सौराष्ट्र
मृत्यु 23 जून, 1939
मुख्य रचनाएँ 'आनन्दी कौआ', 'चालाक खरगोश','बुढ़िया और बंदरिया
भाषा गुजराती भाषा
प्रसिद्धि लेखक, शिक्षाशास्त्री
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी गीजू भाई ने विभिन्न शैलियों में एक सौ से अधिक पुस्तकों की रचना की है।

गिजुभाई बधेका (अंग्रेज़ी: Gijubhai Badheka, जन्म-15 नवम्बर, 1885, सौराष्ट्र; मृत्यु- 23 जून, 1939) गुजराती भाषा के लेखक और महान् शिक्षाशास्त्री थे। छोटे बच्चों की शिक्षा को नई दिशा देने में इनका अत्यधिक योगदान रहा है। गीजू भाई समाज सुधार और राष्ट्रीय महत्त्व के अन्य कामों में भी पूरी रुचि लेते थे। 'दक्षिणामूर्ति' संस्था से गीजू भाई 1936 तक जुड़े रहे।

परिचय

गीजू भाई का जन्म 15 नवम्बर, 1885 को सौराष्ट्र के चित्तल नामक स्थान में हुआ था। उनका असली नाम 'गिरिजा शंकर बधेका' था, लेकिन वे गीजू के नाम से ही प्रसिद्ध हुए। बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के कारण लोग उन्हें 'मोछाई माँ' अर्थात् मूछों वाली माँ भी कहते थे। छोटे बच्चों की शिक्षा को नई दिशा देने ने इनका अत्याधिक योगदान रहा है। उन्होंने अपनी संस्था में हरिजनों को प्रवेश दिया और बारदोली सत्याग्रह के समय लोगों की सहायता के लिए बच्चों की 'वानर सेना' संगठित की। गीजू भाई को कॉलेज की शिक्षा बीच में छोड़ कर आजीविका के लिए 1907 में पूर्वी अफ्रीका जाना पड़ा। वहाँ से वापस आने पर उन्होंने कानून की शिक्षा पूरी की और वकालत करने लगे थे।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भारतीय चरित्र कोश |लेखक: लीलाधर शर्मा 'पर्वतीय' |प्रकाशक: शिक्षा भारती,मदरसा कश्मीरी रोड, दिल्ली |पृष्ठ संख्या: 229 |
  2. गिजुभाई बधेका, बालकथाएँ (हिंदी) गद्य कोश। अभिगमन तिथि: 23 अक्टूबर, 2016।

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