अज्ञेय, सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन  

अज्ञेय, सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन
सच्चिदानंद वात्स्यायन
पूरा नाम सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'
जन्म 7 मार्च, 1911
जन्म भूमि कुशीनगर, उत्तर प्रदेश
मृत्यु 4 अप्रैल, 1987
मृत्यु स्थान नई दिल्ली
अभिभावक पण्डित हीरानंद शास्त्री
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र साहित्य, सामाजिक
मुख्य रचनाएँ 'आँगन के पार द्वार', 'कितनी नावों में कितनी बार', 'क्योंकि मैं उसे जानता हूँ', 'एक जीवनी' आदि।
विषय कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, यात्रा वृत्तांत, वैयक्तिक निबंध, वैचारिक निबंध, आत्मचिंतन, अनुवाद, समीक्षा, संपादन
भाषा हिन्दी
विद्यालय मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज, फ़ॉर्मन कॉलेज, लाहौर
शिक्षा बी.एस.सी., एम.ए. (अंग्रेज़ी)
पुरस्कार-उपाधि भारतीय पुरस्कार, अंतर्राष्ट्रीय 'गोल्डन रीथ' पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार (1964), ज्ञानपीठ पुरस्कार (1978)
नागरिकता भारतीय
साहित्यिक आंदोलन नई कविता, प्रयोगवाद
काल आधुनिक काल
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (अंग्रेज़ी: Sachchidananda Hirananda Vatsyayan 'Agyeya', जन्म: 7 मार्च, 1911 कुशीनगर; मृत्यु: 4 अप्रैल, 1987 नई दिल्ली) हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार थे। अज्ञेय को प्रतिभासम्पन्न कवि, शैलीकार, कथा साहित्य को एक महत्त्वपूर्ण मोड़ देने वाले कथाकार, ललित-निबन्धकार, सम्पादक और सफल अध्यापक के रूप में जाना जाता है।

व्यक्तिगत जीवन

अज्ञेय जी के पिता पण्डित हीरानंद शास्त्री प्राचीन लिपियों के विशेषज्ञ थे। इनका बचपन इनके पिता की नौकरी के साथ कई स्थानों की परिक्रमा करते हुए बीता। कुशीनगर में अज्ञेय जी का जन्म 7 मार्च, 1911 को हुआ था। लखनऊ, श्रीनगर, जम्मू घूमते हुए इनका परिवार 1919 में नालंदा पहुँचा। नालंदा में अज्ञेय के पिता ने अज्ञेय से हिन्दी लिखवाना शुरू किया। इसके बाद 1921 में अज्ञेय का परिवार ऊटी पहुँचा ऊटी में अज्ञेय के पिता ने अज्ञेय का यज्ञोपवीत कराया और अज्ञेय को वात्स्यायन कुलनाम दिया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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