सआदत हसन मंटो  

सआदत हसन मंटो
Saadat-Hasan-Manto.jpg
पूरा नाम सआदत हसन
अन्य नाम मंटो
जन्म 11 मई, 1912
जन्म भूमि समराला, पंजाब
मृत्यु 18 जनवरी, 1955
मृत्यु स्थान लाहौर, पंजाब
अभिभावक ग़ुलाम हसन, सरदार बेगम
पति/पत्नी सफ़िया
संतान तीन पुत्री
कर्म भूमि भारत
मुख्य रचनाएँ तमाशा, बू, ठंडा गोश्त, टोबा टेक सिंह, खोल दो, घाटे का सौदा, हलाल और झटका, ख़बरदार, करामात, बेख़बरी का फ़ायदा, पेशकश आदि।
विषय कहानी, फ़िल्म और रेडियो पटकथा लेखक, पत्रकार
भाषा हिन्दी, उर्दू
विद्यालय मुस्लिम हाईस्कूल, अमृतसर, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी सआदत हसन मंटो की गिनती ऐसे साहित्यकारों में की जाती है जिनकी कलम ने अपने वक़्त से आगे की ऐसी रचनाएँ लिख डालीं जिनकी गहराई को समझने की दुनिया आज भी कोशिश कर रही है।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

सआदत हसन मंटो (अंग्रेज़ी: Saadat Hasan Manto, जन्म:11 मई, 1912, समराला, पंजाब; मृत्यु: 18 जनवरी, 1955, लाहौर) कहानीकार और लेखक थे। मंटो फ़िल्म और रेडियो पटकथा लेखक और पत्रकार भी थे। मंटो की कहानियों की बीते दशक में जितनी चर्चा हुई है, उतनी शायद उर्दू और हिन्दी और शायद दुनिया के दूसरी भाषाओं के कहानीकारों की कम ही हुई है। आंतोन चेखव के बाद मंटो ही थे, जिन्होंने अपनी कहानियों के दम पर अपनी जगह बना ली।

जीवन परिचय

सआदत हसन मंटो की गिनती ऐसे साहित्यकारों में की जाती है जिनकी कलम ने अपने वक़्त से आगे की ऐसी रचनाएँ लिख डालीं जिनकी गहराई को समझने की दुनिया आज भी कोशिश कर रही है।[1] प्रसिद्ध कहानीकार मंटो का जन्म 11 मई 1912 को पुश्तैनी बैरिस्टरों के परिवार में हुआ था। उनके पिता ग़ुलाम हसन नामी बैरिस्टर और सेशन जज थे। उनकी माता का नाम सरदार बेगम था, और मंटो उन्हें बीबीजान कहते थे। मंटो बचपन से ही बहुत होशियार और शरारती थे। मंटो ने एंट्रेंस इम्तहान दो बार फेल होने के बाद पास किया। इसकी एक वजह उनका उर्दू में कमज़ोर होना था। मंटो का विवाह सफ़िया से हुआ था। जिनसे मंटो की तीन पुत्री हुई।

उन्हीं दिनों के आसपास मंटो ने तीन-चार दोस्तों के साथ मिलकर एक ड्रामेटिक क्लब खोला था और आग़ा हश्र का एक नाटक प्रस्तुत करने का इरादा किया था। "यह क्लब सिर्फ़ 15-20 दिन रहा था, इसलिए कि मंटो के पिता ने एक दिन धावा बोलकर हारमोनियम और तबले सब तोड़-फोड़ दिए थे और कह दिया था, कि ऐसे वाहियात काम उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं।"[2]

मंटो की कहानियों की बीते दशक में जितनी चर्चा हुई है उतनी शायद उर्दू और हिन्दी और शायद दुनिया के दूसरी भाषाओं के कहानीकारों की कम ही हुई है। आंतोन चेखव के बाद मंटो ही थे जिन्होंने अपनी कहानियों के दम पर अपनी जगह बना ली। उन्होंने जीवन में कोई उपन्यास नहीं लिखा।[3]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 सआदत हसन मंटो (हिन्दी) (एच टी एम) वेबदुनिया। अभिगमन तिथि: 10 मई, 2011
  2. 2.0 2.1 2.2 2.3 2.4 2.5 सआदत हसन मंटो / परिचय (हिन्दी) गद्य कोश। अभिगमन तिथि: 10 मई, 2011
  3. सआदत हसन मंटो (हिन्दी) (एच टी एम एल) ब्रांड बिहार। अभिगमन तिथि: 10 मई, 2011
  4. सआदत हसन मंटो (हिन्दी) (एच टी एम एल) अपनी हिन्दी। अभिगमन तिथि: 10 मई, 2011

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