नाथूरामशर्मा 'शंकर'  

नाथूरामशर्मा 'शंकर'
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पूरा नाम नाथूराम शर्मा
अन्य नाम शंकर
जन्म 1859
जन्म भूमि हंरदुआगंज, अलीगढ़
मृत्यु 1935
मृत्यु स्थान हंरदुआगंज, अलीगढ़
कर्म-क्षेत्र साहित्य, काव्य
मुख्य रचनाएँ 'अनुराग रत्न', 'शंकर सरोज', 'गर्मरण्डा-रहस्य',
भाषा हिंदी, उर्दू, फ़ारसी तथा संस्कृत
प्रसिद्धि साहित्यकार
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी नाथूराम शर्मा ने आयुर्वेद का अध्ययन किया और शीघ्र ही पीयूषपाणि वैद्य के रूप में विख्यात हो गये। खड़ीबोली के काव्य के प्रथम निर्णायकों में नाथूराम शर्मा अग्रणी हैं एवं कविता को समाज के साथ सम्बंधित करने का ऐतिहासिक दायित्व उन्होंने निभाया है।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

नाथूरामशर्मा 'शंकर' (अंग्रेज़ी: Nathuram Sharma, जन्म- 1859, हंरदुआगंज, अलीगढ़; मृत्यु- 1935) बड़े साहित्यानुरागी थे। ये हिंदी, उर्दू, फ़ारसी तथा संस्कृत भाषाओं के अच्छे ज्ञाता थे और पद्यरचना में अत्यंत सिद्ध हस्त थे।

परिचय

नाथूराम शर्मा का जन्म 1859 को हंरदुआगंज, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ था। इनका अन्य नाम शंकर भी है। ये हिंदी, उर्दू एवं फ़ारसी भाषाओं के अच्छे ज्ञाता थे तथा बाद में संस्कृत भाषा में भी पूरी तरह योग्यता अर्जित कर ली थी। नक्शानवीसी और पैमाइस का काम सीखकर वे कानपुर में नहर विभाग में नौकरी करने लगे। अपने कार्य में तो वे दक्ष थे ही दफ्तर के अंग्रेज़ अफसरों को हिंदी भी सिखाते थे। लगभग साढ़े सात साल कानपुर में इस पद पर काम करते रहे, फिर अचानक ही एक दिन स्वाभिमानी नाथूराम शर्मा ने अपने सम्मान के प्रश्न पर नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और जन्म-स्थान को लौट गये। जीविका के लिये उन्होंने नये सिरे से आयुर्वेद का अध्ययन किया और शीघ्र ही पीयूषपाणि वैद्य के रूप में विख्यात हो गये।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हिन्दी साहित्य कोश |लेखक: धीरेंद्र वर्मा (प्रधान) |प्रकाशक: ज्ञानमण्डल लिमिटेड वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी |पृष्ठ संख्या: 297 |

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