परशुराम चतुर्वेदी  

परशुराम चतुर्वेदी
आचार्य परशुराम चतुर्वेदी
पूरा नाम आचार्य परशुराम चतुर्वेदी
जन्म 25 जुलाई, 1894
जन्म भूमि बलिया, उत्तर प्रदेश
मृत्यु 3 जनवरी, 1979
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र समीक्षक, लेखक
भाषा संस्कृत तथा हिन्दी
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी परशुराम चतुर्वेदी ने मनुष्य की चिंतन परंपरा की खोज में संत साहित्य का गहन अध्ययन किया। वे साहित्य में विकासवादी सिद्धांत के पक्षधर थे।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

आचार्य परशुराम चतुर्वेदी (अंग्रेज़ी: Parshuram Chaturvedi, जन्म: 25 जुलाई, 1894; मृत्यु: 3 जनवरी, 1979) परिश्रमशील विद्वान् शोधकर्मी समीक्षक थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया में हुआ था। उनकी शिक्षा इलाहाबाद तथा वाराणसी विश्वविद्यालय में हुई। वे पेशे से वकील थे, किंतु आध्यात्मिक साहित्य में उनकी गहरी रुचि थी। संस्कृत तथा हिन्दी की अनेक उपभाषाओं के वे पंडित थे।

व्यक्तित्व

परशुराम चतुर्वेदी का व्यक्तित्व सहज था। वे सरल स्वभाव के थे। स्नेह और सौहार्द के प्रतिमूर्ति थे। इकहरा शरीर, गौरवर्ण, मध्यम कद काठी और सघन सफेद मूंछें उनके बड़प्पन को प्रकाशित करने के लिये पर्याप्त थीं। उनके मुख मंडल पर परंपरागत साहित्य की कोई विकृति की रेखा नहीं देखी गयी बल्कि एक निश्चित दीप्ति सदा थिरकती रही, जिससे बंधुता एवं मैत्री भाव विकीर्ण होता रहता था। चतुर्वदी जी महान् अन्नवेषक थे। मनुष्य की चिंतन परंपरा की खोज में उन्होंने संत साहित्य का गहन अध्ययन किया। वे मुक्त चिंतन के समर्थक थे, इसलिये किसी सम्प्रदाय या झंडे के नीचे बंधकर रहना पसंद नहीं किया। साहित्य में विकासवादी सिद्धांत के वे पक्षधर थे। उनकी विद्वता के आगे बड़े-बड़ों को हमेशा झुकते देखा गया। उनका जीवन मानवता के कल्याण के प्रति समर्पित था।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. पांडेय, दयानंद। क्या प्रकांड पंडित होना इतना बड़ा पाप है? (हिंदी) सरोकारनामा। अभिगमन तिथि: 22 मार्च, 2014।

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