गुणाढ्य  

गुणाढ्य
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जन्म कम्बोडिया से प्राप्त 875 ई. के एक अभिलेख के आधार पर गुणाढ्य के अस्तित्व की कल्पना 600 ई. से पूर्व की है।
जन्म भूमि प्रतिष्ठानपुर
अभिभावक कीर्तीसेन
कर्म भूमि भारत
मुख्य रचनाएँ आख्यायिका ग्रंथ 'बड़ कथा'
भाषा संस्कृत, पाली, प्राकृत, पैशाची
विद्यालय गुणाढ्य ने दक्षिणापथ में विद्यार्जन किया था।
प्रसिद्धि विद्वान्
अन्य जानकारी कुछ आचार्य 'बड़ कथा' को व्यास और वाल्मीकि की रचनाओं के क्रम में तीसरी महान् कृति मानकर गुणाढ्य को व्यास का अवतार मानते हैं।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

गुणाढ्य प्रसिद्ध आख्यायिका ग्रंथ 'बड़ कथा', जो कि पैशाची भाषा में लिखा गया था, के प्रणेता थे। विद्वानों में गुणाढ्य के समय को लेकर मतभेद हैं। संस्कृत तथा अपभ्रंश ग्रंथों में जो उल्लेख प्राप्त होते हैं, वे 7वीं शताब्दी से प्राचीन नहीं है। कीथ ने कम्बोडिया से प्राप्त 875 ई. के एक अभिलेख के आधार पर गुणाढ्य के अस्तित्व की कल्पना 600 ई. से पूर्व की है। गुणाढ्य की विद्वता से प्रभावित होकर ही सातवाहन वंश के राजा ने उन्हें अपना मंत्री बना लिया था।

जन्म तथा शिक्षा

क्षेमेंद्र कृत 'बृहत्कथामंजरी' के एक विवरण के अनुसार गुणाढ्य प्रतिष्ठान निवासी कीर्तीसेन के पुत्र थे। गुणाढ्य ने दक्षिणापथ में विद्यार्जन किया था। वे प्रतिभा के धनी और विद्वता से परिपूर्ण थे, यही कारण था कि सातवाहन राजा उनसे प्रभावित हुआ और उन्हें अपना मंत्री नियुक्त किया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. वृहत् कथा
  2. शर्मा 'पर्वतीय', लीला धर भारतीय चरित कोश (हिंदी)। भारत डिस्कवरी पुस्तकालय: शिक्षा भारती, कश्मीरी गेट, दिल्ली, 237।

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