माधवराव सप्रे  

माधवराव सप्रे
माधवराव सप्रे
पूरा नाम पं. माधवराव सप्रे
जन्म 19 जून, 1871[1]
जन्म भूमि पथरिया ग्राम, दमोह ज़िला, मध्य प्रदेश
मृत्यु 23 अप्रॅल, 1926
मृत्यु स्थान रायपुर, छत्तीसगढ़
कर्म-क्षेत्र कहानीकार, निबंधकार, समीक्षक, अनुवादक, संपादक
मुख्य रचनाएँ स्वदेशी आंदोलन और बॉयकाट, यूरोप के इतिहास से सीखने योग्य बातें, हमारे सामाजिक ह्रास के कुछ कारणों का विचार, माधवराव सप्रे की कहानियाँ, हिंदी केसरी (पत्रिका), छत्तीसगढ़ मित्र (पत्रिका) आदि
भाषा हिंदी
विद्यालय कलकत्ता विश्वविद्यालय
शिक्षा बी.ए., एल.एल.बी.
नागरिकता भारतीय
संबंधित लेख माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय
अन्य जानकारी माधवराव सप्रे जी की कहानी 'एक टोकरी भर मिट्टी' को हिंदी की पहली कहानी होने का श्रेय प्राप्त है।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

पं. माधवराव सप्रे (अंग्रेज़ी:Madhavrao Sapre, जन्म: 19 जून, 1871 - मृत्यु: 23 अप्रॅल, 1926[1]) राष्ट्रभाषा हिन्दी के उन्नायक, प्रखर चिंतक, मनीषी संपादक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और सार्वजनिक कार्यों के लिये समर्पित कार्यकर्ताओं की श्रृंखला तैयार करने वाले प्रेरक-मार्गदर्शक थे। गुरु कर्मयोगी पं. माधवराव सप्रे का कृतित्व और अवदान कालजयी है। माधवराव सप्रे जी की कहानी 'एक टोकरी भर मिट्टी' को हिंदी की पहली कहानी होने का श्रेय प्राप्त है।

जीवन परिचय

माधवराव सप्रे जी का जन्म 19 जून 1871 में मध्य प्रदेश के दमोह ज़िले के पथरिया ग्राम में हुआ था।[1] बिलासपुर में मिडिल तक की पढ़ाई के बाद मेट्रिक शासकीय विद्यालय रायपुर से उत्तीर्ण किया। 1899 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से बी. ए. करने के बाद उन्हें तहसीलदार के रुप में शासकीय नौकरी मिली लेकिन जैसा कि उस समय के देशभक्त युवाओं में एक परंपरा थी सप्रे जी ने भी शासकीय नौकरी की परवाह न की। सन 1900 में जब समूचे छत्तीसगढ़ में प्रिंटिंग प्रेस नही था तब इन्होंने बिलासपुर ज़िले के एक छोटे से गांव पेंड्रा से "छत्तीसगढ़ मित्र" नामक मासिक पत्रिका निकाली। हालांकि यह पत्रिका सिर्फ़ तीन साल ही चल पाई। सप्रे जी ने लोकमान्य तिलक के मराठी केसरी को यहां हिंद केसरी के रुप में छापना प्रारंभ किया, साथ ही हिंदी साहित्यकारों व लेखकों को एक सूत्र में पिरोने के लिए नागपुर से हिंदी ग्रंथमाला भी प्रकाशित की। इन्होंने कर्मवीर के प्रकाशन में भी महती भूमिका निभाई। सप्रे जी ने लेखन के साथ-साथ विख्यात संत समर्थ रामदास के मराठी दासबोध व महाभारत की मीमांसा, दत्त भार्गव, श्री राम चरित्र, एकनाथ चरित्र और आत्म विद्या जैसे मराठी ग्रंथों, पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद भी बखूबी किया। 1924 में हिंदी साहित्य सम्मेलन के देहरादून अधिवेशन में सभापति रहे सप्रे जी ने 1921 में रायपुर में राष्ट्रीय विद्यालय की स्थापना की और साथ ही रायपुर में ही पहले कन्या विद्यालय जानकी देवी महिला पाठशाला की भी स्थापना की। यह दोनों विद्यालय आज भी चल रहे हैं।[2]

सप्रे जी के कुछ स्मरणीय कथन
  1. "मैं महाराष्ट्री हूं पर हिंदी के विषय में मु्झे उतना ही अभिमान है जितना कि किसी हिंदीभाषी को हो सकता है।"
  2. "जिस शिक्षा से स्वाभिमान की वृत्ति जागृत नहीं होती वह शिक्षा किसी काम की नहीं है"
  3. "विदेशी भाषा में शिक्षा होने के कारण हमारी बुद्धि भी विदेशी हो गई है।"

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 माधवराव सप्रे (हिंदी) हिंदी समय। अभिगमन तिथि: 24 अप्रॅल, 2014।
  2. हिंदी की पहली कहानी और माधवराव सप्रे (हिंदी) अवारा बंजारा। अभिगमन तिथि: 24 अप्रॅल, 2014।
  3. 3.0 3.1 3.2 3.3 पत्रकारिता व साहि‍त्य के ऋषि पं. माधवराव सप्रे (हिंदी) आरंभ। अभिगमन तिथि: 24 अप्रॅल, 2014।
  4. कर्मयोगी पं. माधवराव सप्रे (हिंदी) सप्रे संग्रहालय। अभिगमन तिथि: 24 अप्रॅल, 2014।

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