लोचन प्रसाद पाण्डेय  

लोचन प्रसाद पाण्डेय
लोचन प्रसाद पाण्डेय
पूरा नाम लोचन प्रसाद पाण्डेय
जन्म जन्म- 4 जनवरी, 1887 ई.
जन्म भूमि बिलासपुर[1], मध्य प्रदेश
मृत्यु 8 नवम्बर, 1959
अभिभावक पंडित चिंतामणि पाण्डेय (पिता)
कर्म भूमि भारत
मुख्य रचनाएँ 'दो मित्र', 'प्रवासी', 'कविता कुसुम माला', 'मेवाड़ गाथा', 'पद्य पुष्पांजलि', 'छात्र दुर्दशा', 'ग्राम्य विवाह विधान' आदि।
भाषा उड़िया, बंगला और संस्कृत
पुरस्कार-उपाधि 'काव्य विनोद' एवं 'साहित्य-वाचस्पति'
प्रसिद्धि साहित्यकार, उपन्यासकार, कहानीकार
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी सन 1923 में लोचन प्रसाद जी ने 'छत्तीसगढ़ गौरव प्रचारक मंडली' की स्थापना की थी, जो बाद में 'महाकौशल इतिहास परिषद' कहलाया।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

लोचन प्रसाद पाण्डेय (अंग्रेज़ी: Lochan Prasad Pandey ; जन्म- 4 जनवरी, 1887 ई., बिलासपुर[2], मध्य प्रदेश; मृत्यु- 8 नवम्बर,1959 ई.) प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार थे। इन्होंने हिन्दी एवं उड़िया, दोनों भाषाओं में काव्य रचनाएँ भी की हैं। सन 1905 से ही इनकी कविताएँ 'सरस्वती' तथा अन्य मासिक पत्रिकाओं में निकलने लगी थीं। लोचन प्रसाद पाण्डेय की कुछ रचनाएँ कथाप्रबंध के रूप में हैं तथा कुछ फुटकर। 'भारतेंदु साहित्य समिति' के भी ये सदस्य थे। मध्य प्रदेश के साहित्यकारों में इनकी विशेष प्रतिष्ठा थी। आज भी इनका नाम बड़े आदर से लिया जाता है।

जन्म तथा परिवार

लोचन प्रसाद पाण्डेय का जन्म 4 जनवरी, सन 1887 ई. में मध्य प्रदेश के बिलासपुर ज़िले में बालपुर नामक ग्राम में हुआ था। बिलासपुर अब छत्तीसगढ़ राज्य का हिस्सा है। लोचन प्रसाद पाण्डेय के पिता पंडित चिंतामणि पाण्डेय विद्याव्यसनी थे। उन्होंने अपने गाँव में बालकों की शिक्षा के लिए एक पाठशाला खुलवाई थी। लोचन प्रसाद जी अपने पिता के चतुर्थ पुत्र थे। वे आठ भाई थे- पुरुषोत्तम प्रसाद, पदमलोचन, चन्द्रशेखर, लोचन प्रसाद, विद्याधर, वंशीधर, मुरलीधर और मुकुटधर तथा चंदन कुमारी, यज्ञ कुमारी, सूर्य कुमारी और आनंद कुमारी, ये चार बहनें थीं।[3]

शिक्षा

लोचन प्रसाद पाण्डेय की प्रारंभिक शिक्षा बालपुर की निजी पाठशाला में हुई। सन 1902 में मिडिल स्कूल संबलपुर से पास किया और 1905 में कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) से इंटर की परीक्षा पास करके बनारस गये, जहाँ अनेक साहित्य मनीषियों से उनका संपर्क हुआ। उन्होंने अपने प्रयत्न से ही उड़िया, बंगला और संस्कृत का भी ज्ञान प्राप्त किया था। लोचन प्रसाद पाण्डेय ने अपने जीवन काल में अनेक जगहों का भ्रमण किया। साहित्यिक गोष्ठियों, सम्मेलनों, कांग्रेस अधिवेशन, इतिहास-पुरातत्व खोजी अभियान में वे सदा तत्पर रहे। उनके खोज के कारण अनेक गढ़, शिलालेख, ताम्रपत्र, गुफ़ा प्रकाश में आ सके। सन 1923 में उन्होंने 'छत्तीसगढ़ गौरव प्रचारक मंडली' की स्थापना की, जो बाद में 'महाकौशल इतिहास परिषद' कहलाया। उनका साहित्य, इतिहास और पुरातत्व में समान अधिकार था।

स्वभाव

लोचन प्रसाद पाण्डेय स्वभाव से सरल एवं निश्छल थे। इनका व्यवहार आत्मीयतापूर्ण हुआ करता था। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से पाठकों को चरित्रोत्थान की प्रेरणा दी। उस समय उपदेशक का कार्य भी साहित्य के सहारे करना आज की तरह नहीं था, इसलिए इनकी रचनाओं ने पाठकों के संयम के प्रति रुचि उत्पन्न की। ये 'भारतेन्दु साहित्य समिति' के एक सम्मानित सदस्य थे। मध्य प्रदेश में इनके प्रति बड़ा आदर, सम्मान एवं प्रतिष्ठा का भाव है।[4]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. अब छत्तीसगढ़ राज्य में सम्मिलित
  2. अब छत्तीसगढ़ राज्य में सम्मिलित
  3. 3.0 3.1 छत्तीसगढ़ के गौरव पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय (हिन्दी) अश्विनी केसरवानी की रचनाएँ। अभिगमन तिथि: 07 मई, 2015।
  4. 4.0 4.1 हिन्दी साहित्य कोश, भाग 2 |प्रकाशक: ज्ञानमण्डल लिमिटेड, वाराणसी |संकलन: भारतकोश पुस्तकालय |संपादन: डॉ. धीरेंद्र वर्मा |पृष्ठ संख्या: 553 |

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