आशापूर्णा देवी  

आशापूर्णा देवी
आशापूर्णा देवी
पूरा नाम आशापूर्णा देवी
जन्म 8 जनवरी, 1909
जन्म भूमि कलकत्ता[1], पश्चिम बंगाल
मृत्यु 13 जुलाई, 1995
कर्म भूमि पश्चिम बंगाल
कर्म-क्षेत्र साहित्य
मुख्य रचनाएँ प्रथम प्रतिश्रुति (1964), आकाश माटी (1975), प्रेम ओ प्रयोजन (1944) आदि।
भाषा बांग्ला
पुरस्कार-उपाधि टैगोर पुरस्‍कार (1964), लीला पुरस्‍कार, पद्मश्री (1976) और ज्ञानपीठ पुरस्कार (1976)
प्रसिद्धि बांग्‍ला उपन्‍यासकार
नागरिकता भारतीय
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इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

आशापूर्णा देवी (अंग्रेज़ी: Ashapoorna Devi, जन्म: 8 जनवरी, 1909, कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता); मृत्यु: 13 जुलाई, 1995) बांग्ला भाषा की प्रख्‍यात उपन्यासकार थीं, जिन्होंने मात्र 13 वर्ष की आयु में लिखना प्रारंभ कर दिया था और तब से ही उनकी लेखनी निरंतर सक्रिय बनी रही।

आरंभिक जीवन

आशापूर्णा देवी मध्‍यवर्गीय परिवार से थीं, पर स्‍कूल-कॉलेज जाने का सुअवसर उन्‍हें कभी नहीं मिला। उनके परिवेश में उन सभी निषेधों का बोलबाला था, जो उस युग के बंगाल को आक्रांत किए हुए थे, लेकिन पढ़ने, गुनने और अपने विचार व्‍यक्‍त करने की भरपूर सुविधाएं उन्‍हें शुरू से मिलती रहीं। उनके पिता कुशल चित्रकार थे, माँ बांग्‍ला साहित्‍य की अनन्‍य प्रेमी और तीनों भाई कॉलेज के छात्र थे। ज़ाहिर है, उस समय के जाने-माने साहित्‍यकारों और कला शिल्‍पियों को निकट से देखने-जानने के अवसर आशापूर्णा को आए दिन मिलते रहे। ऐसे परिवेश में उनके मानस का ही नहीं, कला चेतना और संवेदनशीलता का भी भरपूर विकास हुआ। भले ही पिता के घर और फिर पति के घर भी पर्दे आदि के बंधन बराबर रहे, पर कभी घर के किसी झरोखे से भी यदि बाहर के संसार की झलक मिल गई, तो उनका सजग मन उधर के समूचे घटनाचक्र की कल्‍पना कर लेता। इस प्रकार देश के स्‍वतंत्रता संघर्ष, असहयोग आंदोलन, राजनीति के क्षेत्र में नारी का पर्दापण और फिर पुरुष वर्ग की बराबरी में दायित्‍वों का निर्वाह, सब कुछ उनकी चेतना पर अंकित हुआ।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. (वर्तमान कोलकाता)

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