लक्ष्मी मल्ल सिंघवी  

लक्ष्मी मल्ल सिंघवी
लक्ष्मी मल्ल सिंघवी
पूरा नाम लक्ष्मी मल्ल सिंघवी
जन्म 9 नवम्बर, 1931
जन्म भूमि जोधपुर, राजस्थान
मृत्यु 6 अक्टूबर, 2007
मृत्यु स्थान नई दिल्ली
कर्म भूमि भारत
मुख्य रचनाएँ 'संध्या का सूरज: हिन्दी काव्य', 'पुनश्च' - संस्मरणों का संग्रह, 'भारत हमारा समय', 'जैन मंदिर' आदि।
भाषा हिन्दी
पुरस्कार-उपाधि 'पद्म भूषण' (1998)
प्रसिद्धि कवि, लेखक, भाषाविद, संविधान विशेषज्ञ और प्रसिद्ध न्यायविद।
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी लक्ष्मी मल सिंघवी ने नेपाल, बांग्लादेश और दक्षिण अफ़्रीका के संविधान रचे। उन्हें भारत में अनेक लोकपाल, लोकायुक्त संस्थाओं का जनक माना जाता है।
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लक्ष्मी मल्ल सिंघवी (अंग्रेज़ी: Laxmi Mall Singhvi, 9 नवम्बर, 1931, जोधपुर; मृत्यु- 6 अक्टूबर, 2007, नई दिल्ली) जानेमाने भारतीय कवि, लेखक, भाषाविद, संविधान विशेषज्ञ और प्रसिद्ध न्यायविद थे। उन्होंने हिन्दी के वैश्वीकरण और हिन्दी के उन्नयन की दिशा में सजग, सक्रिय और ईमानदार प्रयास किए। वे भारतीय संस्कृति के राजदूत, ब्रिटेन में हिन्दी के प्रणेता और हिन्दी-भाषियों के लिए प्रेरणा स्रोत थे। जैन धर्म के इतिहास और संस्कृति के जानकार के रूप में मशहूर लक्ष्मी मल्ल सिंघवी ने कई पुस्तकें भी लिखीं, जिनमें से अनेक हिन्दी में हैं। भारत सरकार उन्हें 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया था।

परिचय

लक्ष्मी मल्ल सिंघवी का जन्म 9 नवम्बर, 1931 को जोधपुर, राजस्थान में हुआ था। सन 1962 से 1967 तक तीसरी लोक सभा के सदस्य सिंघवी ने 1972 से 1977 तक राजस्थान के एडवोकेट जनरल तथा अनेक वर्षों तक यूके में भारत के राजदूत पद पर कार्य किया। 1999 में वे राज्य सभा के सदस्य भी चुने गए। लक्ष्मी मल सिंघवी ने नेपाल, बांग्लादेश और दक्षिण अफ़्रीका के संविधान रचे। उन्हें भारत में अनेक लोकपाल, लोकायुक्त संस्थाओं का जनक माना जाता है।

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