मनु शर्मा  

मनु शर्मा
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पूरा नाम मनु शर्मा
जन्म 1928
जन्म भूमि अकबरपुर, फैजाबाद
मृत्यु 8 नवंबर, 2017
मृत्यु स्थान वाराणसी, उत्तर प्रदेश
कर्म भूमि बनारस, उत्तर प्रदेश
कर्म-क्षेत्र लेखक, कवि, नाटककार
मुख्य रचनाएँ 'गुनाहों का देवता', 'सूरज का सातवाँ घोड़ा', 'अंधायुग' आदि
विषय गद्य, पद्य, नाटक तथा उपन्यास
भाषा हिन्दी
विद्यालय इलाहाबाद विश्वविद्यालय
शिक्षा एम. ए. (हिन्दी), पी.एच.डी.
पुरस्कार-उपाधि पद्मश्री, हल्दीघाटी श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार, व्यास सम्मान, साहित्य अकादमी रत्न सदस्यता और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
विशेष योगदान धर्मवीर भारती साप्ताहिक पत्रिका 'धर्मयुग' के प्रधान संपादक रहे।
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी मनु शर्मा का उपन्यास 'गुनाहों का देवता' हिन्दी साहित्य के इतिहास में सदाबहार माना जाता है।
अद्यतन‎
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

मनु शर्मा (अंग्रेजी: Manu Sharma, जन्म: 1928, अकबरपुर, फैजाबाद - मृत्यु: 8 नवंबर, 2017 वाराणसी, उत्तर प्रदेश) आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख लेखक हैं। ‘आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों, परसों नहीं तो बरसों बाद मैं डायनासोर के जीवाश्म की तरह पढ़ा जाऊँगा।’ इसी विश्वास के साथ मनु शर्मा की रचना-यात्रा खुद की बनाई पगडंडी पर जारी है। हिंदी की खेमेबंदी से दूर मनु शर्मा ने साहित्य की हर विधा में लिखा है। उनके समृद्ध रचना-संसार में आठ खंडों में प्रकाशित ‘कृष्ण की आत्मकथा’ भारतीय भाषाओं का विशालतम उपन्यास है। ललित निबंधों में वे अपनी सीमाओं का अतिक्रमण करते हैं तो उनकी कविताएँ अपने समय का दस्तावेज हैं।[1]

परिचय

मनु शर्मा का जन्म 1928 में अकबरपुर, फैजाबाद में हुआ था। वे बेहद अभावों में पले-बढ़े हैं। घर चलाने के लिए फेरी लगाकर कपड़ा और मूंगफली तक बेचा। बनारस के डीएवी कॉलेज में उन्‍हें चपरासी की नौकरी मिली, लेकिन उनके गुरु कृष्‍णदेव प्रसाद गौड़ उर्फ 'बेढ़ब बनारसी' ने उनसे पुस्‍तकालय में काम लिया। पुस्‍तकालय में पुस्‍तक उठाते-उठाते उनमें पढ़ने की ऐसी रुचि जगी कि पूरा पुस्‍तकालय ही चाट गए। उन्‍होंने अपनी कलम से पौराणिक उपन्‍यासों को आधुनिक संदर्भ दिया है।

कार्टून कविता

70 के दशक में मनु शर्मा बनारस से निकलने वाले 'जनवार्ता' में प्रतिदिन एक 'कार्टून कविता' लिखते थे। यह इतनी मारक होती थी कि आपात काल के दौरान इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। जयप्रकाश नारायण कहा करते थे- "यदि संपूर्ण क्रांति को ठीक ढंग से समझना हो तो 'जनवार्ता' अखबार पढ़ा करो।" मनु शर्मा ने अपनी 'कार्टून कविता' के जरिए हर घर-हर दिल पर उस दौरान दस्‍तक दी थी।

राजकुमार हिरानी ने मनु शर्मा की पुस्‍तक 'गांधी लौटे' के विचार की चोरी कर इस पर फिल्‍म का निर्माण किया था। राजकुमार हिरानी ने मनु शर्मा का आभार तक व्‍यक्‍त करना उचित नहीं समझा। 'लगे रहो मुन्‍ना भाई' 2006 में आई थी और 'गांधी लौटे' एक श्रृंखला के रूप में। 'गांधी लौटे' के बहुत सारे डायलॉग भी मनु शर्मा जी की पुस्‍तक से चुराए गए थे। मनु शर्मा जी को जब यह बताया गया तो उन्‍होंने कहा- "किसी के भी जरिए हो, समाज में विचार पहुंच तो रहे हैं न।" क्‍या आज का एक भी साहित्‍यकार या पत्रकार इस सोच के स्‍तर को कभी छू सकता है।[2]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 मनु शर्मा (हिन्दी) pustak.org। अभिगमन तिथि: 22 जुलाई, 2017।
  2. 2.0 2.1 मनु शर्मा व रामबहादुर राय, जिनके गले से लगकर सम्‍मानित हुआ 'पद्मश्री' (हिन्दी) aadhiabadi.in। अभिगमन तिथि: 22 जुलाई, 2017।

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