मुकुंदी लाल श्रीवास्तव  

मुकुंदी लाल श्रीवास्तव
मुकुंदी लाल श्रीवास्तव
पूरा नाम मुकुंदी लाल श्रीवास्तव
जन्म 25 अक्टूबर, 1896
जन्म भूमि गोरझामर ग्राम, सागर ज़िला, मध्य प्रदेश
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र लेखन
मुख्य रचनाएँ 'अवनति क्यों हुई', 'रणधीर पराक्रम', 'हिन्दी शब्द संग्रह', 'साम्राज्यवाद', 'बृहत् हिन्दी कोश', 'ज्ञान शब्द कोश', 'पारिभाषिक शब्द कोश' आदि।
भाषा हिन्दी
शिक्षा बी.ए., एम.ए. (प्रीवियस)[1]
प्रसिद्धि साहित्यकार
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी मुकुंदी लाल तथा राजवल्लभ सहाय ने कई वर्षों के कठिन परीश्रम के बाद 'हिन्दी शब्द संग्रह' नामक एक बहुमूल्य कोश तैयार किया था। इसमें आधुनिक हिन्दी के अतिरिक्त ब्रजभाषा, अवधी, बुन्देलखण्डी आदि के कई बहुसंख्यक शब्दों का समावेश किया गया था।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

मुकुंदी लाल श्रीवास्तव (अंग्रेज़ी: Mukundi Lal Srivastava; जन्म- 25 अक्टूबर, 1896, सागर ज़िला, मध्य प्रदेश) भारत के प्रसिद्ध साहित्यकार तथा लेखक थे। इनकी प्रथम रचना सन 1912 ई. के 'बाल हितैषी' (मेरठ) में प्रकाशित हुई थी। इसके बाद इनके कई लेख और कविताएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। मुकुंदी लाल ने 'ज्ञानमण्डल' एवं 'काशी विद्यापीठ' में रहकर लगभग 20 पुस्तकों का सम्पादन करने के अतिरिक्त 'ग्रीस और रोम के महापुरुष' एवं 'पश्चिमी यूरोप' के द्वितीय भाग के अर्धांश का अनुवाद किया। इसमें राजवल्लभ सहाय का भी सहयोग इनको मिला था। इसके अतिरिक्त इन्होंने तथा राजवल्लभ सहाय ने कई वर्षों के कठिन परीश्रम के बाद 'हिन्दी शब्द संग्रह' नामक एक बहुमूल्य कोश भी तैयार किया।

जन्म

मुकुंदी लाल श्रीवास्तव का जन्म रविवार, 25 अक्टूबर, सन 1896 ई. में सागर ज़िले के 'गोरझामर' नामक ग्राम में अपने मामा के यहाँ हुआ था। ये जबलपुर, मध्य प्रदेश के निवासी थे।[2]

शिक्षा

मुकुंदी लाल श्रीवास्तव ने मैट्रिक तथा एफ.ए. में उत्तीर्ण छात्रों में सर्वप्रथम स्थान प्राप्त किया था, जिस कारण राज्य की ओर से वे छात्रवृत्ति पाते रहे। इसके बाद बी.ए. में भी इनको सरकारी छात्रवृत्ति मिली। मुकुंदी लाल श्रीवास्तव की शिक्षा इनके मामा के यहाँ ही हुई थी। नवम्बर, 1917 ई. में मामा की मृत्यु हो जाने के कारण उनके परिवार के भरण-पोषण की आवश्यकता वश इन्होंने पढ़ाई छोड़कर स्टेट हाईस्कूल में नौकरी कर ली। बाद में बड़े मामा की नौकरी लग जाने पर ये अपने घर जबलपुर चले आये और 'राबर्टसन कालेज' से सन 1920 ई. में बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की।

बाद में मुकुंदी लाल 'दर्शनशास्त्र' में एम.ए. करने के विचार से नागपुर चले गये और वहाँ से सरकारी महाविद्यालय में प्रविष्ट हो गये। उसी वर्ष नागपुर में 'राष्ट्रीय महासभा' का अधिवेशन हुआ। उसमें स्वीकृत असहयोग के प्रस्ताव से प्रभावित होकर इन्होंने एम.ए. प्रीवियस की पढ़ाई समाप्त हो जाने पर कॉलेज छोड़ दिया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. नागपुर में 'राष्ट्रीय महासभा' का अधिवेशन हुआ था। उसमें स्वीकृत असहयोग के प्रस्ताव से प्रभावित होकर मुकुंदी लाल श्रीवास्तव ने एम.ए. प्रीवियस की पढ़ाई समाप्त हो जाने पर कॉलेज छोड़ दिया।
  2. 2.0 2.1 2.2 2.3 हिन्दी साहित्य कोश, भाग-2 |लेखक: डॉ. धीरेन्द्र वर्मा |प्रकाशक: ज्ञानमण्डल लिमिटेड |पृष्ठ संख्या: 451 |

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