श्याम बहादुर वर्मा  

श्याम बहादुर वर्मा
श्याम बहादुर वर्मा
पूरा नाम श्याम बहादुर वर्मा
जन्म 10 अप्रैल, 1932
जन्म भूमि बरेली, उत्तर प्रदेश
मृत्यु 20 नवम्बर, 2009
मृत्यु स्थान नई दिल्ली
अभिभावक पिता- लाल बहादुर वर्मा, माता- विद्यावती वर्मा
कर्म भूमि भारत
मुख्य रचनाएँ ‘बृहत् विश्व सूक्ति कोश’ (तीन खण्डों में), ‘श्री अरविन्द साहित्य दर्शन’, ‘हमारे सांस्कृतिक प्रतीक’, ‘भारत का संविधान’ तथा ‘राष्ट्रनिर्माता स्वामी विवेकानन्द’ आदि।
भाषा हिन्दी
शिक्षा एम.एससी. (गणित विषय), एम.ए. ('प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृति)।
पुरस्कार-उपाधि 'साहित्यकार सम्मान' (1997-98)
प्रसिद्धि विद्वान, विचारक, लेखक और कवि
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी श्याम बहादुर जी ने विवेकानंद केन्द्र की हिन्दी 'केन्द्र पत्रिका' का संपादन किया। 'हिन्दू चेतना', 'हिन्दू विश्व', 'पाञ्चजन्य', 'राष्ट्रधर्म' आदि पत्रिकाओं में वे लिखते ही थे। हिन्दुस्तान और नवभारत टाइम्स जैसे दैनिक पत्रों ने भी उन्हें प्रकाशित किया।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

श्याम बहादुर वर्मा (अंग्रेज़ी: Shyam Bahadur Verma; जन्म- 10 अप्रैल, 1932, उत्तर प्रदेश; मृत्यु- 20 नवम्बर, 2009, नई दिल्ली) बहुमुखी प्रतिभाशाली, अनेक विषयों के विद्वान, विचारक और कवि थे। उन्होंने हिन्दी साहित्य को कई शब्दकोश प्रदान किये थे। उनके प्रत्येक कमरे में फर्श से लेकर छत तक पुस्तकें ही पुस्तकें नज़र आती थीं। श्याम बहादुर वर्मा ने विविध भाषाओं तथा ज्ञान-विज्ञान की अनेकानेक शाखाओं का गहन अध्ययन किया। 1953 में उन्होंने अकेले ही हिमालय को पैदल पार कर तिब्बत की यात्रा की थी। उनकी सम्पूर्ण साहित्यिक सेवाओं के लिये हिन्दी अकादमी, दिल्ली ने वर्ष 1997-98 में उन्हें 'साहित्यकार सम्मान' प्रदान किया था।

जन्म

श्याम बहादुर वर्मा का जन्म 10 अप्रैल, 1932 को उत्तर प्रदेश में बरेली ज़िले के आँवला नामक नगर में हुआ था। उनके पिता का नाम लाल बहादुर वर्मा और माता विद्यावती थीं। श्रीमती विद्यावती वर्मा बरेली में बड़ी समर्पित सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ता थीं और 1960 से हौम्योपेथी की प्रेक्टिस करती थीं। पति के निधन के बाद उन्होंने बड़ी कठिन परिस्थितियों में परिवार को न केवल चलाया अपितु बच्चों को श्रेष्ठ संस्कार भी दिए।[1]

शिक्षा

1946 में चौदह वर्ष की आयु में ही श्याम बहादुर वर्मा 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' के स्वयंसेवक बन गये थे और 1948 में संघ पर अन्यायपूर्ण प्रतिबंध के विरोध में सत्याग्रह करके जेल गये। उन दिनों वे शाहजहांपुर में बी.एससी. के छात्र थे। 1950 में बी.एससी. पास करने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कमज़ोर होने के कारण वे एम.एससी. में प्रवेश नहीं ले पाये और एक वर्ष तक अपना पूरा समय संघ कार्य में ही लगाया। उस समय उन पर तीन धुन सवार थीं- 'संघ कार्य', 'अधिक से अधिक शिक्षार्जन' और 'परिवार को आर्थिक सहारा'। फिर वे अपने गृह जनपद बरेली आ गये और वहीं रहते हुए उन्होंने सन 1952 में 'साहित्यरत्न' और 'आयुर्वेदरत्न' की परीक्षाएँ उत्तीर्ण कीं। उनमें शिक्षार्जन की भूख बहुत प्रबल थी। अत: आर्थिक परेशानी में भी ट्यूशन पढ़ाकर बरेली कॉलेज से 1953 में गणित विषय में एम.एससी. पास कर ही लिया। उन्होंने 1967 में 'आगरा विश्वविद्यालय' से 'प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृति' में एम.ए. की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 स्वरूप, देवेन्द्र। स्व. डा. श्याम बहादुर वर्मा - बौद्धिक साधना में लीन स्वयंसेवक (हिन्दी) पंचजन्या। अभिगमन तिथि: 31 दिसम्बर, 2015।

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