विवेकी राय  

विवेकी राय
विवेकी राय
पूरा नाम विवेकी राय
अन्य नाम कविजी
जन्म 19 नवम्बर, 1924
जन्म भूमि ज़िला गाजीपुर, उत्तर प्रदेश
मृत्यु 22 नवम्बर, 2016
मृत्यु स्थान वाराणसी
अभिभावक पिता - शिवपाल राय, माता - जविता देवी
मुख्य रचनाएँ 'श्वेत पत्र' (1979), 'सोनमाटी' (1983), 'किसानों का देश' (1956), 'बबूल' (1964), 'सर्कस' (2005), 'उठ जाग मुसाफ़िर' (2012) आदि।
विद्यालय श्री सर्वोदय इण्टर कॉलेज खरडीहां गाज़ीपुर
शिक्षा बी.ए. (1961), एम.ए. (1964) एवं पी. एच. डी. (1970)
पुरस्कार-उपाधि 'यश भारती पुरस्कार', 'प्रेमचन्द पुरस्कार', 'आचार्य शिवपूजन सहाय पुरस्कार' आदि।
प्रसिद्धि लेखक, अध्यापक
नागरिकता भारतीय
धर्म हिंदू
भोजपुरी रचनाएँ 'गंगा, यमुना, सरस्वती'; 'जनता के पोखरा' आदि।
अन्य जानकारी विश्वविद्यालयों के एम.फिल. एवं पी. एच. डी. के छात्रों द्वारा डॉ. विवेकी राय पर 70 से अधिक शोध कार्य किये गये हैं।
अद्यतन‎ 04:31, 16 दिसम्बर-2016 (IST)
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

विवेकी राय (अंग्रेज़ी: Viveki Rai, जन्म- 19 नवम्बर, 1924, ज़िला गाजीपुर, उत्तर प्रदेश; मृत्यु- 22 नवम्बर, 2016, वाराणसी ) हिन्दी और भोजपुरी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार थे। वे ग्रामीण भारत के प्रतिनिधि रचनाकार थे। विवेकी राय ने 50 से अधिक पुस्तकों की रचना की थी। वे ललित निबंध, कथा साहित्य और कविता कर्म में समभ्यस्त थे। आज भी विवेकी राय को ‘कविजी’ उपनाम से जाना जाता है।[1]

जन्म एवं परिचय

डॉ.विवेकी राय हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार थे। ये मूलतः मुहम्मदाबदा तहसील के सोनवानी गांव के रहने वाले थे। उनका जन्म अपने ननिहाल भरौली (बलिया) ज़िला गाजीपुर, उत्तर प्रदेश में 19 नवंबर 1924 को हुआ था। विवेकी राय के जन्म से डेढ़ माह पहले पिता शिवपाल राय का प्लेग की महामारी में निधन हो गया था। माँ जविता देवी थीं। पिता के अभाव में उनका बचपन ननिहाल में मामा बसाऊ राय की देख-रेख में बीता था। ये देहाती धरती की ऊष्मा से बने एक सीधे सच्चे कर्मठ इंसान थे। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से अपने को कहाँ से कहाँ तक उठाया था। विवेकी राय गाँव की खेती-बारी भी देखते थे और गाजीपुर में अध्यापन तथा साहित्य सेवा में भी लीन रहते थे। गाँव के उत्तरदायित्व का पूरा निर्वाह करते हुए भी उन्होंने बहुत लगन से विपुल साहित्य पढ़े और लिखे थे। विवेकी राय अपने मित्रों और परिचतों में तथा पाठकों में भी बहुत प्यार से जाने जाते थे। वे स्वभावतः गम्भीर एवं खुश-मिज़ाज़ रचनाकार थे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी, सीधे, सच्चे, उदार एवं कर्मठ व्यक्ति थे। ललाट पर एक बड़ा सा तिल, सादगी, सौमनस्य, गंगा की तरह पवित्रता, ठहाका मारकर हँसना, निर्मल आचार-विचार इनकी विशेषताएँ थीं। सदा खादी के घवल वस्त्रों में दिखने वाले, अतिथियों का ठठाकर आतिथ्य सत्कार करने वाले साहित्य सृजन हेतु नवयुवकों को प्रेरित करने वाले आप भारतीय संस्कृति की साक्षात प्रतिमूर्ति थे। डॉ. विवेकी राय का जीवन सादगी पूर्ण था। गम्भीरता उनका आभूषण था। दूसरों के प्रति अपार स्नेह एवं सम्मान का भाव सदा वे रखते थे। सबसे खुलकर गम्भीर विषय की निष्पत्ति एवं चर्चा करना उनका स्वभाव था। अपने इन्हीं गुणों के कारण विवेकी राय बहुतों के लिए वे परम पूज्य एवं आदरणीय बने गए थे। कुल मिलाकर वे संत प्रकृति के सज्जन थे। विवेकी राय 1964 में गाजीपुर के पीजी कॉलेज के हिंदी विभाग में नियुक्त हुए थे। सालों विभागाध्यक्ष रहे थे। 1988 में वहां से सेवानिवृत्त हुए थे। उसके पूर्व विवेकी राय ने 13 साल तक अपने निकटवर्ती गांव खरडीहा के सर्वोदय इंटर कॉलेज में अध्यापन किया था।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. गाज़ीपुर के गौरव और यश भारती से सम्मानित विख्यात साहित्यकार डॉ. विवेकी राय का निधन (हिन्दी) gorakhpurtimes.com। अभिगमन तिथि: 14 दिसम्बर, 2016।
  2. गाज़ीपुर के साहित्यकार (हिन्दी) hindisahityavimarsh.blogspot.in। अभिगमन तिथि: 14 दिसम्बर, 2016।
  3. गाज़ीपुर के साहित्यकार (हिन्दी) patnanow.com। अभिगमन तिथि: 14 दिसम्बर, 2016।

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