राजेन्द्रलाल मित्रा  

राजेन्द्रलाल मित्रा
राजेन्द्रलाल मित्रा
पूरा नाम राजेन्द्रलाल मित्रा
जन्म 16 फ़रवरी, 1822
जन्म भूमि कोलकाता
मृत्यु 27 जुलाई, 1891
कर्म भूमि भारत
मुख्य रचनाएँ 'उड़ीसा का पुरातत्व', 'बोध गया', 'शाक्य मुनि', 'छांदोग्य उपनिषद', 'तैत्तरीय ब्राह्मण और आरण्यक', 'गोपथ ब्राह्मण' आदि।
पुरस्कार-उपाधि 'रायबहादुर' और 'राजा' 1888
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी राजेन्द्रलाल मित्रा अपनी कार्यवाही जीवन की पूरी अवधि में भारतीय वांङ्मय की खोज और उसे पाठकों के लिए उपलब्ध कराने में लगे रहे।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

राजेन्द्रलाल मित्रा (अंग्रेज़ी: Rajendralal Mitra ,जन्म: 16 फ़रवरी, 1822, कोलकाता; मृत्यु: 27 जुलाई, 1891) भारत विद्या से संबंधित विषयों के प्रख्यात विद्वान् थे।[1]इन्होंने संस्कृत, फ़ारसी, बंगला और अंग्रेजी भाषाओं में दक्षता-प्राप्त की थी। इन्होंने अनेक ग्रंथ एवं रचनाओं का संपादन किया है। राजेन्द्रलाल मित्रा 25 वर्ष तक 'वाडिया इंस्टीट्यूट' के निदेशक रहे थे।

जन्म एवं शिक्षा

राजा राजेन्द्रलाल मित्रा का जन्म 16 फ़रवरी, 1822 ई. में कोलकाता में हुआ था। इनकी शिक्षा में बड़ी बाधाएं आईं। 15 वर्ष की उम्र में मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुए। वहां चार वर्ष की पढ़ाई में अपनी योग्यता से बड़ी ख्याति अर्जित की, पर कुछ कारणों से डिग्री नहीं ले सके। फिर इन्होंने कानून की पढ़ाई आरंभ की, पर पर्चे आउट हो जाने की सूचना से यहां भी परीक्षा नहीं हो सकी। लेकिन अपने अध्यवसाय से इन्होंने संस्कृत, फ़ारसी, बंगला और अंग्रेजी भाषाओं में दक्षता-प्राप्त की और 1849 में प्रसिद्ध संस्था 'एशियाटिक सोसायटी' के सहायक मंत्री बन गए। यहां पर पुस्तकों और पांड्डलिपियों का भंडार इनके अध्ययन के लिए खुल गया। 10 वर्ष सोसायटी में रहने के बाद 25 वर्ष तक वे 'वाडिया इंस्टीट्यूट' के निदेशक रहे। फिर भी सोसायटी से इनका संपर्क बना रहा।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भारतीय चरित कोश |लेखक: लीलाधर शर्मा 'पर्वतीय' |प्रकाशक: शिक्षा भारती, मदरसा रोड, कश्मीरी गेट, दिल्ली |पृष्ठ संख्या: 714 |

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