नागपुर  

दीक्षाभूमि, नागपुर

नागपुर शहर की स्थापना देवगढ़ (छिंदवाड़ा) के शासक गोंड वंश के राजा ने की थी। संतरे की राजधानी के रूप में विख्यात नागपुर महाराष्ट्र का तीसरा सबसे बड़ा शहर है। पर्यटन की दृष्टि से यह महाराष्ट्र के अग्रणी शहरों में शुमार किया जाता है। यहाँ बने अनेक मंदिर, ऐतिहासिक इमारतें और झील यहाँ आने वाले सैलानियों के केन्द्र में होते हैं। इस शहर से बहने वाली नाग नदी के कारण इसका नाम नागपुर पड़ा। नागपुर की स्थापना देवगढ़ के गोंड राजा बख़्त बुलंद शाह ने 1703 ई. में की थी। यह शहर 1960 तक मध्य भारत राज्य की राजधानी था। 1960 के बाद यहाँ की मराठी आबादी को देखते हुए इसे महाराष्ट्र के ज़िले के रूप में शामिल कर लिया गया।

स्थापना

नागपुर शहर दक्षिण-पश्चिमी भारत के महाराष्ट्र राज्य में अवस्थित है। भौगोलिक दृष्टि से यह लगभग भारत के केन्द्र में स्थित है। अठारहवीं शताब्दी के आरम्भ में गोंड राजा बख्त बुलंद द्वारा इसकी स्थापना की गई थी। नागपुर ब्रिटिशकालीन मध्य भारत की एक रियासत थी। जिसे पेशवा बाजीराव प्रथम के समय रघुजी भोंसले ने अपनी राजधानी बनाया। 1761 ई. के पश्चात् नागपुर के भोंसले स्वतंत्र रुप से इस पर शासन करने जगे। 1817 ई. में यह ब्रिटिश प्रभाव में आ गया। 1854 ई. में लॉर्ड ड्लहौजी ने नागपुर रियासत को नागपुर नरेश के उत्तराधिकारी न होने के कारण जब्त कर ब्रिटिश साम्राज्य का अंग बना दिया तथा वहाँ के राजवंश के कीमती रत्न-आभूषणों को नीलाम कर दिया। वर्तमान में नागपुर में भोंसले वंश के शासनकाल का एक दुर्ग तथा अन्य भवनादि स्थित हैं। 1861 ई. में इसे मध्य प्रांत की राजधानी बना दिया गया, जो 1956 ई. तक रही।

दीक्षाभूमि, नागपुर

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=नागपुर&oldid=595857" से लिया गया