आगरा  

आगरा
ताजमहल, आगरा
विवरण 'आगरा' उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध ऐतिहासिक नगर तथा पर्यटन स्थल है। मुग़लकालीन ऐतिहासिक इमारतों के लिए यह शहर बहुत प्रसिद्ध है।
राज्य उत्तर प्रदेश
ज़िला आगरा
स्थापना सुल्तान सिकंदरशाह लोदी (1504 ई.)
भौगोलिक स्थिति 27.18° उत्तर 78.02° पूर्व में यमुना नदी के तट पर स्थित
प्रसिद्धि ऐतिहासिक पर्यटन स्थल
रेलवे स्टेशन आगरा कैण्ट, राजा की मण्डी, आगरा फ़ोर्ट, आगरा सिटी
बस अड्डा आईएसबीटी (ट्रांसपोर्ट नगर), ईदगाह, बिजलीघर
क्या देखें ताजमहल, फ़तेहपुर सीकरी, लाल क़िला, सिकंदरा, एतमादुद्दौला का मक़बरा, मेहताब बाग़ आदि।
एस.टी.डी. कोड 0562
ए.टी.एम लगभग सभी
प्रशासनिक भाषा हिन्दी, अंग्रेज़ी
वाहन पंजीयन सं. यूपी-80
अन्य जानकारी शाहजहाँ के दिल्ली चले जाने के पश्चात् आगरा फिर कभी मुग़लों की राजधानी न बन सका, यद्यपि यह मुग़ल काल का एक प्रमुख नगर तो अंत तक बना ही रहा।

आगरा उत्तर प्रदेश प्रान्त का प्रसिद्ध शहर, ज़िला व तहसील है। यह 27.18° उत्तर 78.02° पूर्व में यमुना नदी के तट पर स्थित है। भारतीय इतिहास में यह नगर अपना विशिष्ट स्थान रखता था। ऐतिहासिक इमारतों के लिए भी आगरा बहुत प्रसिद्ध है। समुद्र-तल से इसकी औसत ऊँचाई क़रीब 171 मीटर (561 फ़ीट) है। यह उत्तर में मथुरा, दक्षिण में धौलपुर, पूर्व में फ़िरोज़ाबाद, शिकोहाबाद, दक्षिण पूर्व में फ़तेहाबाद और पश्चिम में भरतपुर से घिरा हुआ है। आगरा उत्तर प्रदेश का तीसरा सबसे बड़ा शहर है। ताजमहल आगरा की विशेष पहचान है, जो यमुना नदी के किनारे स्थित है। उत्तर प्रदेश सहित आगरा सम्पूर्ण भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है।

स्थापना

मुग़ल काल के इस प्रसिद्ध नगर की नींव दिल्ली के सुल्तान सिकंदरशाह लोदी ने 1504 ई. में डाली थी। उसने अपने शासन काल में होने वाले विद्रोहों को भली भांति दबाने के लिए वर्तमान आगरा के स्थान पर एक सैनिक छावनी बनाई थी, जिसके द्वारा उसे इटावा, बयाना, कोल, ग्वालियर और धौलपुर के विद्रोहियों को दबाने में सहायता मिली। 'मखजन-ए-अफ़ग़ान' के लेखक के अनुसार सुल्तान सिकंदरशाह ने कुछ चतुर आयुक्तों को दिल्ली, इटावा और चांदवर के आस-पास के इलाके में किसी उपयुक्त स्थान पर सैनिक छावनी बनाने का काम सौंपा था और उन्होंने काफ़ी छानबीन के पश्चात् इस स्थान (आगरा) को चुना था। अब तक आगरा या 'अग्रवन' केवल एक छोटा-सा गाँव था, जिसे 'ब्रजमंडल' के चौरासी वनों में अग्रणी माना जाता था। शीघ्र ही इसके स्थान पर एक भव्य नगर खड़ा हो गया। कुछ दिन बाद सिंकदरशाह भी यहाँ आकर रहने लगा। 'तारीख़दाऊदी' के लेखक के अनुसार सिकंदरशाह प्राय: आगरा में ही रहा करता था।

मध्य काल में आगरा गुजरात तट के बंदरगाहों और पश्चिमी गंगा के मैदानों के बीच के व्यापार मार्ग पर एक महत्त्वपूर्ण शहर हुआ करता था। मुग़ल साम्राज्य के पतन के साथ 18वीं सदी के उत्तरार्ध में यह शहर क्रमशः जाटों, मराठों, मुग़लों और ग्वालियर के शासक के अधीन रहा और अंततः 1803 में ब्रिटिश शासन के अंतर्गत आ गया। 1833 से 1868 तक यह आगरा प्रांत (बाद में पश्चिमोत्तर प्रांत) की राजधानी रहा।

अग्रबाण या अग्रवन

आगरा एक ऐतिहासिक नगर है, जिसका प्रमाण यह अपने चारों ओर समेटे हुए है। इतिहास में आगरा का प्रथम उल्लेख महाभारत के समय से माना जाता है, जब इसे 'अग्रबाण' या 'अग्रवन' के नाम से संबोधित किया जाता था। कहा जाता है कि पहले यह नगर 'आर्य गृह' के नाम से भी जाना जाता था। तौलमी[1] पहला ज्ञात व्यक्ति था, जिसने इसे 'आगरा' नाम से संबोधित किया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. Ptolmi 2nd century A.D.

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