हिन्दी संस्थान  

केंद्रीय हिन्दी संस्थान प्रतीक चिह्न
प्रकार विश्व में हिंदी शिक्षा, प्रचार-प्रसार एवं प्रकाशन
स्थापना 19 मार्च, 1960 ई. को भारत सरकार के तत्कालीन 'शिक्षा एवं समाज कल्याण मंत्रालय' ने एक स्वायत्तशासी संस्था 'केंद्रीय हिन्दी शिक्षण मंडल' का गठन किया और 1 नवम्बर 1960 को इस संस्थान का लखनऊ में पंजीकरण करवाया गया।
संस्थापक मानव संसाधन विकास मंत्रालय (तत्कालीन शिक्षा एवं समाज कल्याण मंत्रालय), भारत सरकार
मुख्यालय आगरा
शाखाएँ आगरा मुख्यालय के अतिरिक्त आठ शाखाएँ हैं जो दिल्ली, हैदराबाद, गुवाहाटी, शिलांग, मैसूर, दीमापुर, भुवनेश्वर और अहमदाबाद में हैं।
प्रमुख लोग अध्यक्ष- श्रीमती स्मृति ईरानी, उपाध्यक्ष- डॉ. कमल किशोर गोयनका, निदेशक- प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय[1]
वेबसाइट केंद्रीय हिंदी संस्थान
संबंधित लेख हिन्दी संस्थान आगरा, हिन्दी संस्थान दिल्ली, हिन्दी संस्थान हैदराबाद, हिन्दी संस्थान गुवाहाटी, हिन्दी संस्थान शिलांग, हिन्दी संस्थान मैसूर, हिन्दी संस्थान दीमापुर, हिन्दी संस्थान भुवनेश्वर, हिन्दी संस्थान अहमदाबाद
अन्य जानकारी हिन्दी संस्थान का प्रमुख कार्य हिन्दी भाषा से संबंधित शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करना, शोध कार्य कराना और साथ ही हिन्दी के प्रचार व प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाना है।
अद्यतन‎

हिन्दी संस्थान अथवा केंद्रीय हिन्दी संस्थान भारत सरकार के 'मानव संसाधन विकास मंत्रालय' के अधीन एक उच्चतर शैक्षिक और शोध संस्थान है। संविधान के अनुच्छेद 351 के दिशा-निर्देशों के अनुसार हिन्दी को समर्थ और सक्रिय बनाने के लिए अनेक शैक्षिक, सांस्कृतिक और व्यावहारिक अनुसंधानों के द्वारा हिन्दी शिक्षण-प्रशिक्षण, हिन्दी भाषाविश्लेषण, भाषा का तुलनात्मक अध्ययन तथा शिक्षण सामग्री आदि के निर्माण को संगठित और परिपक्व रूप देने के लिए सन् 1961 में भारत सरकार के तत्कालीन 'शिक्षा एवं समाज कल्याण मंत्रालय' ने 'केंद्रीय हिन्दी संस्थान' की स्थापना उत्तर प्रदेश के आगरा नगर में की थी।

केंद्रीय हिन्दी संस्थान (मुख्यालय) में अफ़ग़ानिस्तान के छात्रों का विशेष पाठ्यक्रम

हिन्दी संस्थान का प्रमुख कार्य हिन्दी भाषा से संबंधित शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करना, शोध कार्य कराना और साथ ही हिन्दी के प्रचार व प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाना है। प्रारंभ में हिन्दी संस्थान का प्रमुख कार्य 'अहिन्दी भाषी क्षेत्रों' के लिए योग्य, सक्षम और प्रभावकारी हिन्दी अध्यापकों को ट्रेनिंग कॉलेज और स्कूली स्तरों पर शिक्षा देने के लिए प्रशिक्षित करना था, किंतु बाद में हिन्दी के शैक्षिक प्रचार-प्रसार और विकास को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने अपने दृष्टिकोण और कार्य क्षेत्र को विस्तार दिया, जिसके अंतर्गत हिन्दी शिक्षण-प्रशिक्षण, हिन्दी भाषा-परक शोध, भाषा विज्ञान तथा तुलनात्मक साहित्य आदि विषयों से संबंधित मूलभूत वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यक्रमों को संचालित करना प्रारंभ कर दिया और साथ ही विविध स्तरों के शैक्षिक पाठ्यक्रम, शैक्षिक सामग्री, अध्यापक निर्देशिकाएँ आदि तैयार करने का कार्य भी प्रारंभ किया गया। इस प्रकार के विस्तृत दृष्टिकोण और कार्यक्रमों के आयोजन से हिन्दी संस्थान का कार्यक्षेत्र अत्यधिक विस्तृत और विशाल हो गया। इन सभी कार्यक्रमों के कारण हिन्दी संस्थान ने केवल भारत में ही नहीं वरन् अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति और मान्यता प्राप्त की।

केंद्रीय हिन्दी संस्थान पुस्तकालय

हिन्दी संस्थान की स्थापना

हिन्दी भाषा के अखिल भारतीय स्वरूप को समान स्तर का बनाने के लिए और साथ ही पूरे भारत में हिन्दी भाषा के शिक्षण को सबल आधार देने के उद्देश्य से 19 मार्च, 1960 ई. को भारत सरकार के तत्कालीन 'शिक्षा एवं समाज कल्याण मंत्रालय' ने एक स्वायत्तशासी संस्था 'केंद्रीय हिन्दी शिक्षण मंडल' का गठन किया और 1 नवम्बर 1960 को इस संस्थान का लखनऊ में पंजीकरण करवाया गया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. आधिकारिक वेबसाइट

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