मानवेन्द्र नाथ राय  

मानवेन्द्र नाथ राय
मानवेन्द्र नाथ राय
पूरा नाम मानवेन्द्र नाथ राय
अन्य नाम नरेन्द्र नाथ भट्टाचार्य
जन्म 21 मार्च, 1887
जन्म भूमि पश्चिम बंगाल
मृत्यु 26 जनवरी, 1954
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि दार्शनिक, क्रान्तिकारी विचारक
आंदोलन 1905 ई. में 'बंगाल विभाजन' के विरुद्ध हुए आन्दोलन में सक्रिय भाग लिया।
जेल यात्रा 'कानपुर षड़यंत्र केस' में आपको छह वर्ष जेल की सज़ा हुई थी।
विशेष योगदान आपने भारत में 'कम्युनिस्ट पार्टी' की स्थापना में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
अन्य जानकारी मानवेन्द्र नाथ राय सशक्त संघर्ष द्वारा भारत को विदेशी शासन से स्वतंत्र कराना चाहते थे। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने अनेक वर्षों तक जर्मनी, रूस, चीन, अमेरिका, मैक्सिको आदि देशों की यात्राएँ भी कीं।

मानवेन्द्र नाथ राय (अंग्रेज़ी: Manavendra Nath Roy, जन्म- 21 मार्च, 1887 ई., पश्चिम बंगाल; मृत्यु- 26 जनवरी, 1954 ई.) वर्तमान शताब्दी के भारतीय दार्शनिकों में क्रान्तिकारी विचारक तथा मानवतावाद के प्रबल समर्थक थे। इनका भारतीय दर्शनशास्त्र में भी बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। मानवेन्द्र नाथ राय ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारी संगठनों को विदेशों से धन व हथियारों की तस्करी में सहयोग दिया था। सन 1912 ई. में वे 'हावड़ा षड़यंत्र केस' में गिरफतार भी कर लिये गए थे। इन्होंने भारत में 'कम्युनिस्ट पार्टी' की स्थापना में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था। सन 1922 ई. में बर्लिन से 'द लैंगार्ड ऑफ़ इण्डियन इण्डिपेंडेंन्स' नामक समाचार पत्र भी इन्होंने निकाला। 'कानपुर षड़यंत्र केस' में उन्हें छह वर्ष की सज़ा हुई थी।

परिचय

मानवेन्द्र नाथ राय का जन्म 21 मार्च, 1887 को पश्चिम बंगाल के एक छोटे-से गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता धर्मपरायण व्यक्ति थे और धर्मप्रचार के द्वारा जीविकोपार्जन करते थे। राय का बाल्यकालीन नाम 'नरेन्द्र नाथ भट्टाचार्य' था, जिसे बाद में बदलकर उन्होंने 'मानवेन्द्र नाथ राय' कर लिया और इसी नाम से उन्होंने दर्शन तथा राजनीति के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त की। यद्यपि उनका पालन पोषण धर्मपरायण परिवार में हुआ था, फिर भी बाल्यकाल से ही धर्म में उनकी आस्था नहीं थी।

क्रांतिकारी गतिविधियाँ

14 वर्ष की अल्पायु में ही वे भारत की स्वतंत्रता के लिये होने वाले क्रान्तिकारी आन्दोलनों में सम्मिलित हो गए थे। 1905 ई. में बंगाल विभाजन के विरुद्ध हुए आन्दोलन में उन्होंने सक्रिय भाग लिया था। वे सशक्त संघर्ष के द्वारा भारत को विदेशी शासन से स्वतंत्र कराना चाहते थे और इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने अनेक वर्षों तक जर्मनी, रूस, चीन, अमेरिका, मैक्सिको आदि देशों की यात्राएं भी कीं। इन देशों में वे अनेक महान् विचारकों तथा साम्यवादी नेताओं के सम्पर्क में आये। जिनके क्रान्तिकारी विचारों का उनके दर्शन पर पर्याप्त प्रभाव पड़ा। राय के दर्शन में भौतिकवाद, निरीश्वरवाद, व्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र, अंतर्राष्ट्रीयता और मानवतावाद का विशेष महत्त्व है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

विश्व के प्रमुख दार्शनिक |लेखक: श्री वेद प्रकाश वर्मा |प्रकाशक: वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, नई दिल्ली, 684 |पृष्ठ संख्या: 475 |


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