सोहन सिंह भकना  

सोहन सिंह भकना
सोहन सिंह भकना
पूरा नाम सोहन सिंह भकना
अन्य नाम बाबा सोहन सिंह भकना
जन्म जनवरी, 1870
जन्म भूमि अमृतसर
मृत्यु 20 दिसम्बर, 1968
मृत्यु स्थान खुतराई खुर्द, अमृतसर, पंजाब
पति/पत्नी भाई करम सिंह, राम कौर
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि स्वतंत्रता सेनानी
जेल यात्रा 13 अक्टूबर, 1914
विशेष योगदान सोहन सिंह जी ने क्रांतिकारियों को संगाठित करने तथा अस्त्र-शस्त्र एकत्र करके भारत भेजने की योजना को कार्यन्वित लिया।
अन्य जानकारी लाला हरदयाल ने अमेरिका में 'पैसिफ़िक कोस्ट हिन्दी एसोसियेशन' नामक एक संस्था बनाई थी, जिसके अध्यक्ष सोहन सिंह जी थे।

बाबा सोहन सिंह भकना (अंग्रेज़ी: Sohan Singh Bhakna, जन्म- जनवरी, 1870, अमृतसर; मृत्यु- 20 दिसम्बर, 1968) भारत की आज़ादी के लिए संघर्षरत क्रांतिकारियों में से एक थे। वे अमेरिका में गठित 'ग़दर पार्टी' के प्रसिद्ध नेता थे। लाला हरदयाल ने अमेरिका में 'पैसिफ़िक कोस्ट हिन्दी एसोसियेशन' नाम की एक संस्था बनाई थी, जिसका अध्यक्ष सोहन सिंह भकना को बनाया गया था। इसी संस्था के द्वारा 'गदर' नामक समाचार पत्र भी निकाला गया और इसी के नाम पर आगे चलकर संस्था का नाम भी 'ग़दर पार्टी' रखा गया। अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण सोहन सिंह जी को गिरफ्तार कर आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी। अंग्रेज़ सरकार उन्हें पूरे 16 वर्ष तक जेल में रखना चाहती थी, किंतु उनके स्वास्थ्य को गिरता देख सरकार को उन्हें रिहा करना पड़ा।

जन्म तथा शिक्षा

बाबा सोहन सिंह भकना का जन्म जनवरी, 1870 ई. में अमृतसर ज़िले, पंजाब के 'खुतराई खुर्द' नामक गाँव में एक संपन्न किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम भाई करम सिंह और माँ का नाम राम कौर था। सोहन सिंह जी को अपने पिता का प्यार अधिक समय तक प्राप्त नहीं हो सका। जब वे मात्र एक वर्ष के थे, तभी पिता का देहांत हो गया। उनकी माँ रानी कौर ने ही उनका पालन-पोषण किया। आंरभ में उन्हें धार्मिक शिक्षा दी गई। ये शिक्षा उन्होंने गाँव के ही गुरुद्वारे से प्राप्त की। ग्यारह वर्ष की उम्र में प्राइमरी स्कूल में भर्ती होकर उन्होंने उर्दू पढ़ना आंरभ किया।

विवाह

जब सोहन सिंह दस वर्ष के थे, तभी उनका विवाह बिशन कौर के साथ हो गया, जो लाहौर के समीप के एक ज़मींदार कुशल सिंह की पुत्री थीं। सोहन सिंह जी ने सोलह वर्ष की उम्र में अपनी स्कूली शिक्षा पूर्ण की। वे उर्दू और फ़ारसी में दक्ष थे। युवा होने पर सोहन सिंह बुरे लोगों की संगत में पड़ गये। उन्होंने अपनी संपूर्ण पैतृक संपत्ति शराब पीने और अन्य व्यर्थ के कार्यों में गवाँ दी। कुछ समय बाद उनका संपर्क बाबा केशवसिंह से हुआ। उनसे मिलने के बाद उन्होंने शराब आदि का त्याग कर दिया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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