किंदी  

किंदी अबू यूस्फ़ु इब्ने इसहाक़ अलकिंदी अरब के प्रसिद्ध दार्शनिक थे। दर्शनशास्त्र, ज्योतिष, भौतिक विज्ञान, प्रकाश विज्ञान[1] कीमिया तथा संगीतशास्त्र जैसे तत्कालीन सभी ज्ञान विज्ञान में उन्होंने बड़ी दक्षता प्राप्त की थी। वह अपने काल के बहुत बड़े ज्योतिषी माने जाते थे। उत्तर कालीन यूनानी विचारधारा के अनुसार किंदी को तत्वज्ञानी अथवा विचारवादी माना जाता है। उन्होंने नव-पाइथेगोरसवादी गणित को समस्त विज्ञानों का आधार माना और अफ़लातून (प्लेटो) तथा अरस्तु के विचारों का नव प्लेटो संबंधी ढंग से समन्वय का प्रयत्न किया। किंदी ने प्रकाश विज्ञान पर भी विशद रूप से प्रकाश डाला।

जन्म

किंदी का जन्म कूफ़ा में 9वीं सदी ई. के मध्य हुआ था। वह दक्षिण अरब वंशीय होने के कारण फैलसूफुल अरब अथवा अरब का दार्शनिक कहलाया। उनकी शिक्षा-दीक्षा बसरा और बग़दाद में हुई थी। वहीं रहकर वह उन्नति के शिखर पर पहुँचे। वह अब्बासी खलीफ़ाओं के दरबार में विभिन्न पदों पर रहे।[2]

आश्रय

खलीफ़ा मामून (813 ई. - 833 ई.) तथा खलीफ़ा मोतसिम (833 ई. - 852 ई.) उनके बहुत बड़े आश्रयदाता थे। उन्हें कभी यूनानी दार्शनिकों के ग्रंथ के अनुवादक एवं संपादक का पद, कभी राजज्योतिषी का पद प्राप्त होता रहा। उस समय अब्बासी ख़लीफाओं के दरबार में मोतजेला दर्शन का बड़ा जोर था। इनका मूल सिद्धांत था कि ईश्वर दिखाई नहीं दे सकता; आदमी जो कुछ करता है, वह स्वयं करता है, ईश्वर कुछ नहीं करता। किंतु जब खलीफ़ा मुतवक्किल (874 ई. - 861ई.) के समय इस विचारधारा का दमन हुआ तब किंदी को काफ़ी हानि उठानी पड़ी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. ऑप्टिक्स
  2. 2.0 2.1 2.2 किंदी (हिन्दी) भारतखोज। अभिगमन तिथि: 20 जून, 2014।
  3. ईका

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