पाणिनि  

पाणिनि
पाणिनि के सम्मान में भारत सरकार द्वारा जारी डाक टिकट
पूरा नाम पाणिनि
जन्म 500 ईसा पूर्व
जन्म भूमि गांधार
मुख्य रचनाएँ अष्टाध्यायी
प्रसिद्धि संस्कृत के व्याकरणाचार्य
विशेष योगदान संस्कृत भाषा को व्याकरण सम्मत रूप देने में पाणिनि का योगदान अतुलनीय माना जाता है।
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी पाणिनि ने अपने समय की संस्कृत भाषा की सूक्ष्म छानबीन की थी। इस छानबीन के आधार पर उन्होंने जिस व्याकरण शास्त्र का प्रवचन किया, वह न केवल तत्कालीन संस्कृत भाषा का नियामक शास्त्र बना, अपितु उसने आगामी संस्कृत रचनाओं को भी प्रभावित किया।

पाणिनि (अंग्रेज़ी:Pāṇini) संस्कृत भाषा के प्रसिद्ध और श्रेष्ठ व्याकरणाचार्य हैं। उनके अष्टाध्यायी नामक ग्रन्थ के आठ अध्याय हैं। हर अध्याय में चार पाद हैं। प्रत्येक पाद में प्रस्तुत विषय के अनुसार कम अथवा अधिक सूत्र संख्या है। अत्यन्त संक्षेप में कहे हुए नियम अथवा विधान को सूत्र कहते हैं। अत्यंत संक्षिप्त होना ही पाणिनीय सूत्रों का सबसे निराला वैशिष्ट्य है। उस संक्षेप के लिए महर्षि पाणिनी ने एक स्वतंत्र पद्धति तैयार की है। फलस्वरूप सूत्रों की अधिकांश रचना अत्यधिक तकनीकी और लोक व्यवहार की भाषा से भिन्न हो गई है। पाणिनी सूत्र की भाषा संस्कृत होते हुए भी संस्कृत भाषा के अच्छे ज्ञान मात्र से सूत्रार्थ का ज्ञान असंभव है: तथापि यह व्याकरण बहुत संक्षिप्त हो गया है, बल्कि कुछ एक हद तक दुर्बोध भी हो गया है, फिर भी एक एक सूत्र से बड़ा शब्द समूह सिद्ध हो जाता है। यह एक बड़ा लाभ है।

परिचय

पाणिनि (500 ईसा पूर्व) संस्कृत व्याकरण शास्त्र के सबसे बड़े प्रतिष्ठाता और नियामक आचार्य थे। इनका जन्म पंजाब के शालातुला में हुआ था जो आधुनिक पेशावर (पाकिस्तान) के क़रीब तत्कालीन उत्तर पश्चिम भारत के गांधार में हुआ था। इनका जीवनकाल 520-460 ईसा पूर्व माना जाता है। इनके व्याकरण को अष्टाध्यायी कहते हैं। इन्होंने भाषा के शुद्ध प्रयोगों की सीमा का निर्धारण किया, जो प्रयोग अष्टाधायायी की कसौटी पर खरे नहीं उतरे और उन्हें विद्वानों ने 'अपणिनीय' कहकर अशुद्ध घोषित कर दिया। संस्कृत भाषा को व्याकरण सम्मत रूप देने में पाणिनि का योगदान अतुलनीय माना जाता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1. 2. 86
  2. मन्यतरस्याम् 1. 2. 58
  3. 7. 2. 108
  4. 3. 3. 1
  5. 1. 2. 53
  6. 1. 2. 53 से 1. 2. 57
  7. स्वं रूपं शब्दस्याशब्द संज्ञा1. 1. 68
  8. प. भा. 1. 1. 68
  9. वा. प. 1. 123
  10. 1.1.50
  11. 1.2
  12. 1.3
  13. 2.4
  14. 3.4
  15. 6.4
  16. 8.2
  17. तस्य वापः 5.1.45
  18. 3.4.52
  19. 1.1.20
  20. 1.1.22
  21. 1.2.65
  22. 4.1.162
  23. काशिका– 6.2.104
  24. पदमञ्जरी–4.1.81
  25. 6.3.109
  26. 1.2.45
  27. 1.2.46

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