माघ कवि  

Disamb2.jpg माघ एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें:- माघ (बहुविकल्पी)

संस्कृत भाषा के श्रेष्ठ कवियों में 'माघ' की गणना की जाती है। उनका समय लगभग 675 ई. निर्धारित किया गया है। उनकी सुप्रसिद्ध रचना ‘शिशुपालवध’ नामक महाकाव्य है। इसकी कथा भी महाभारत से ली गई है। इस ग्रन्थ में युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के अवसर पर चेदि नरेश शिशुपाल की कृष्ण द्वारा वध करने की कथा का काव्यात्मक चित्रण किया गया है। माघ वैष्णव मतानुयायी थे। इनकी इच्छा अपने वैष्णव काव्य के माध्यम से शैव मतावलम्बी भारवि से आगे बढ़ जाने की थी। इसके निमित्त इन्होंने काफ़ी प्रयत्न भी किये। उन्होंने अपने ग्रन्थ की रचना किरातार्जुनीयम् की पद्धति पर की। ‘किरात’ की भाँति 'शिशुपालवध' का आरम्भ भी ‘श्री’ शब्द से होता है।

काव्य शैली के आचार्य

माघ अलंकृत काव्य शैली के आचार्य हैं तथा उन्होंने अलंकारों से सुसज्जित पदों का प्रयोग कुशलता से किया है। प्राकृतिक दृश्यों का वर्णन करने में भी वे दक्ष थे। भारतीय आलोचक 'माघ' में कालिदास जैसी उपमा, भारवि जैसा अर्थगौरव तथा दण्डी जैसा पदलालित्य, इन तीनों गुणों को देखते हैं।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. ‘माघे सन्ति जयो गुणा:’
  2. नवसर्गगत माघे नवशब्दो न विद्यते।

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