अद्वयवज्र  

अद्वयवज्र एक प्रसिद्ध आचार्य, टीकाकार और बौद्ध तांत्रिक थे। इनका पूर्व नाम 'दामोदर' था। ये जन्म से ब्राह्मण थे। कुछ सूत्रों के अनुसार इन्हें पूर्वी बंगाल का निवासी क्षत्रिय कहा गया है। अद्वयवज्र ने 'आदिसिद्ध सरह' अथवा 'सरोरुहवज्रवाद' के दोहा कोष की संस्कृत में टीका भी लिखी थी। इनकी संस्कृत रचनाओं का एक संग्रह 'अद्वयवज्रसंग्रह' नाम से बड़ौदा से प्रकाशित हुआ था, जिससे 'वज्रयान' एवं 'सहजयान' के सिद्धांत एवं साधना पर अच्छा प्रकाश पड़ता है।[1]

जन्म काल

अद्वयवज्र जन्म से ब्राह्मण थे। वहीं कुछ लोग इनको रामपाल प्रथम का समकालीन मानते हैं और कुछ लोग इनका समय 10वीं शती का पूर्वार्ध मानते हैं। कुछ सूत्रों के अनुसार इन्हें पूर्वी बंगाल का निवासी और 'क्षत्रिय' कहा गया है। विशेषकर इनका महत्व इसलिए है कि इन्होंने तिब्बत में बौद्ध धर्म का प्रचार एवं प्रसार करने वाले एवं असंख्य भारतीय बौद्ध ग्रंथों के तिब्बती भाषा में अनुवादक सिद्धाचार्य अतिश दीपंकर श्रीज्ञान को दीक्षा दी, साधनाओं में प्रवृत्त किया और विद्या प्रदान की।

अन्य नाम

अद्वयवज्र के अन्य नाम भी थे, जैसे- 'अवधूतिपा' और 'मैत्रिपा'। इनका एक पूर्व नाम 'दामोदर' भी बताया जाता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 अद्वयवज्र (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 15 फ़रवरी, 2014।

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