राजस्थान  

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राजस्थान
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राजधानी जयपुर
राजभाषा(एँ) हिन्दी, राजस्थानी
स्थापना 1 नवंबर, 1956
जनसंख्या 6,86,21,012 [1]
· घनत्व 165 /वर्ग किमी
क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग किमी
भौगोलिक निर्देशांक 26°34′22″ उत्तर 73°50′20″ पूर्व
· ग्रीष्म 25-46 °C
· शरद 8-28 °C
ज़िले 33
सबसे बड़ा नगर जयपुर
बड़े नगर जयपुर, अजमेर, उदयपुर
मुख्य ऐतिहासिक स्थल हल्दीघाटी, जैसलमेर क़िला, चित्तौड़गढ़, आमेर क़िला, दिलवाड़ा जैन मंदिर
मुख्य पर्यटन स्थल जयपुर, पुष्कर, जैसलमेर, माउण्ट आबू
लिंग अनुपात 1000:921[1] ♂/♀
साक्षरता 68%
राज्यपाल कल्याण सिंह[2]
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया
विधानसभा सदस्य 200
लोकसभा क्षेत्र 25
बाहरी कड़ियाँ अधिकारिक वेबसाइट
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राजस्थान (अंग्रेज़ी:Rajasthan) भारत गणराज्य के क्षेत्रफल के आधार पर सबसे बड़ा राज्य है। राजस्थान की राजधानी जयपुर है। इसके पश्चिम में पाकिस्तान, दक्षिण-पश्चिम में गुजरात, दक्षिण-पूर्व में मध्य प्रदेश, उत्तर में पंजाब, उत्तर-पूर्व में उत्तर प्रदेश और हरियाणा है। राज्य का क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग कि.मी. (1,32,139 वर्ग मील) है। भौगोलिक विशेषताओं में पश्चिम में थार मरुस्थल और घग्घर नदी का अंतिम छोर है। विश्व की पुरातन श्रेणियों में प्रमुख अरावली श्रेणी राजस्थान की एकमात्र पहाड़ी है जो माउंट आबू और विश्वविख्यात दिलवाड़ा मंदिर को सम्मिलित करती है। पूर्वी राजस्थान में दो बाघ अभयारण्य, रणथम्भौर एवं सरिस्का हैं और भरतपुर के समीप केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान है, जो पक्षियों की रक्षार्थ निर्मित किया गया है। राजस्थान भारतवर्ष के पश्चिम भाग में अवस्थित है, जो प्राचीन काल से विख्यात रहा है। तब इस प्रदेश में कई इकाईयाँ सम्मिलित थीं, जो अलग-अलग नाम से सम्बोधित की जाती थीं।

इतिहास

राजस्थान का इतिहास प्रागैतिहासिक काल से शुरू होता है। ईसा पूर्व 3000 से 1000 के बीच यहाँ की संस्कृति सिंधु घाटी सभ्यता जैसी थी। 12वीं सदी तक राजस्थान के अधिकांश भाग पर गुर्जरों का राज्य रहा। गुजरात तथा राजस्थान का अधिकांश भाग 'गुर्जरत्रा' अर्थात 'गुर्जरों से रक्षित देश' के नाम से जाना जाता था।[3][4][5]गुर्जर प्रतिहारो ने 300 सालों तक पूरे उत्तरी-भारत को अरब आक्रान्ताओ से बचाया था।[6] बाद में जब राजपूतों ने इस राज्य के विविध भागों पर अपना आधिपत्य जमा लिया तो यह क्षेत्र ब्रिटिश काल में 'राजपूताना' अर्थात 'राजपूतों का स्थान' कहलाने लगा। 12वीं शताब्दी के बाद मेवाड़ पर गुहिलोतों ने राज्य किया। मेवाड़ के अलावा जो अन्य रियासतें ऐतिहासिक दृष्टि से प्रमुख रहीं, वे थीं- भरतपुर, जयपुर, बूँदी, मारवाड़, कोटा, और अलवर। अन्य सभी रियासतें इन्हीं रियासतों से बनीं। इन सभी रियासतों ने 1818 ई. में अधीनस्थ गठबंधन की ब्रिटिश संधि स्वीकार कर ली, जिसमें राजाओं के हितों की रक्षा की व्यवस्था थी, लेकिन इस संधि से आम जनता स्वाभाविक रूप से असंतुष्ट थी। वर्ष 1857 के विद्रोह के बाद लोग 'स्वतंत्रता आंदोलन' में भाग लेने के लिए महात्मा गाँधी के नेतृत्व में एकजुट हुए। सन् 1935 में अंग्रेज़ी शासन वाले भारत में प्रांतीय स्वायत्तता लागू होने के बाद राजस्थान में नागरिक स्वतंत्रता तथा राजनीतिक अधिकारों के लिए आंदोलन और तेज़ हो गया। 1948 में इन बिखरी हुई रियासतों को एक करने की प्रक्रिया शुरू हुई, जो 1956 में राज्य में पुनर्गठन क़ानून लागू होने तक जारी रही। सबसे पहले 1948 में 'मत्स्य संघ' बना, जिसमें कुछ ही रियासतें शामिल हुईं। धीरे-धीरे बाकी रियासतें भी इसमें मिलती गईं। सन् 1949 तक बीकानेर, जयपुर, जोधपुर और जैसलमेर जैसी मुख्य रियासतें इसमें शामिल हो चुकी थीं और इसे 'बृहत्तर राजस्थान संयुक्त राज्य' का नाम दिया गया। सन् 1958 में अजमेर, आबू रोड तालुका और सुनेल टप्पा के भी शामिल हो जाने के बाद वर्तमान राजस्थान राज्य विधिवत अस्तित्व में आया। राजस्थान की समूची पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान पड़ता है, जबकि उत्तर में पंजाब, उत्तर पूर्व में हरियाणा, पूर्व में उत्तर प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में मध्य प्रदेश और दक्षिण-पश्चिम में गुजरात है।

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में योगदान

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में राजस्थान के अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने योगदान दिया है जिसमें से प्रमुख हैं- अंजना देवी चौधरी, छगनराज चौपासनी वाला, गंगा सिंह, घनश्याम दास बिड़ला, घासी राम चौधरी, जमनालाल बजाज, चुन्नीलाल चित्तौड़ा, जयनारायण व्यास, अब्दुल हमीद कैसर, ठाकुर केसरी सिंह, महात्मा रामचन्द्र वीर आदि।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 Rajasthan State Profile (हिंदी) (एच.टी.एम.एल) आधिकारिक वेबसाइट। अभिगमन तिथि: 23 मई, 2014।
  2. राज्यपाल (हिंदी) भारत की आधिकारिक वेबसाइट। अभिगमन तिथि: 30 अगस्त, 2014।
  3. Ramesh Chandra Majumdar (1977) The History and Culture of the Indian People: The classical age। Bharatiya Vidya Bhavan।
  4. (1984) Desa, videsa me? Gurjara kya hai? tatha kya the?: Gurjara itihasa। Akhila Bharatiya Gurjara Samaja Sudhara Sabha।
  5. Surajanasi?ha Shekhavata (1989) Sekhava?i pradesa ka pracina itihasa। Sri Sardula Ejyukesana ?ras?a।
  6. John Keay (2001) India: a history। Grove Press। ISBN 0-8021-3797-0, ISBN 978-0-8021-3797-5

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