जम्मू  

जम्मू
जम्मू शहर का एक दृश्य
विवरण जम्मू शहर, जम्मू-कश्मीर राज्य की शीतकालीन राजधानी है। जम्मू की प्राकृतिक सुंदरता और बर्फीली पहाडियों का मनोरम दृश्य पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खीचता है।
राज्य जम्मू और कश्मीर
ज़िला जम्मू
निर्माता राजा जम्बू लोचन
भौगोलिक स्थिति उत्तर- 32°44′, पूर्व- 74°52′
मार्ग स्थिति जम्मू शहर सड़क द्वारा श्रीनगर से 292 किमी, गुलमर्ग से 335 किमी, कारगिल से 1,099 किमी और दिल्ली से 620 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।
कब जाएँ अक्टूबर से अप्रॅल
कैसे पहुँचें हवाई जहाज़, रेल, बस आदि से पहुँचा जा सकता है।
हवाई अड्डा जम्मू हवाई अड्डा
रेलवे स्टेशन जम्मू तवी स्टेशन
यातायात बस, जीप, टैक्सी, ऑटो रिक्शा आदि
क्या देखें जम्मू पर्यटन
कहाँ ठहरें होटल, धर्मशाला, अतिथि ग्रह
क्या खायें यख़नी, कश्मीरी पुलाव, गुश्तावा, कश्मीरी गोभी आदि
एस.टी.डी. कोड 0191
ए.टी.एम लगभग सभी
Map-icon.gif गूगल मानचित्र
संबंधित लेख अमर महल पैलेस संग्रहालय, डोगरा कला संग्रहालय आदि
भाषा डोगरी, हिन्दी और उर्दू
अन्य जानकारी सर्दियों में यहाँ आप हिमपात का भी मजा ले सकते हैं।
अद्यतन‎
जम्मू जम्मू पर्यटन जम्मू ज़िला

जम्मू शहर, उत्तर भारत जम्मू-कश्मीर राज्य की शीतकालीन राजधानी है। यह श्रीनगर के दक्षिण में तवी नदी के किनारे स्थित है और इसके उत्तर में शिवालिक पर्वतश्रेणी है। अब यह रेलमार्ग से जुड़ा है और एक निर्माण केन्द्र है।

स्थिति

जम्मू 305 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और जम्मू प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है।

इतिहास

एक समय डोगरा राजपूत वंश की राजधानी जम्मू 19वीं शताब्दी में रणजीत सिंह के राज्य का हिस्सा बन गया। जम्मू की स्थापना राजा जम्बू लोचन ने की थी। माना जाता है कि राजा एक बार शिकार करने यहाँ आए थे। उन्होंने एक सरोवर पर एक शेर और बकरी को पानी पीते हुए एक साथ देखा। राजा ने तभी, उसी स्थान पर शहर का निर्माण करवाने का फैसला कर लिया। उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि शक्तिशाली व कमज़ोर दोनों ही शान्ति और उदारता के साथ भी रह सकते हैं। राजा ने अपने नाम पर इस जगह का नाम जम्बू रख दिया। धीरे-धीरे यह जम्‍बू से परिवर्तित होकर जम्मू के नाम से जाने जाना लगा।

जम्मू शहर

ऐसा भी कहा जाता है कि रणजीत सिंह से पहले जम्मू सुकरचकिया मिसल के अधीन था लेकिन कई वर्षों से जम्मू के शासक ने 'अधीनता कर' (टैक्स) देना बंद कर दिया था। रणजीत सिंह ने जम्मू के राजा से 'अधीनता कर' देने को कहा तो उसके इंकार करने पर रणजीत सिंह ने वहाँ की जनता पर काफ़ी अत्याचार किये। परिणाम स्वरूप जम्मू के राजा ने बिना किसी विरोध के आत्मसमर्पण कर दिया और हरजाने के रूप में बीस हज़ार रुपये, हाथी और जेवरात दिए। 1809 ई. में भवानीदास ने जम्मू पर आक्रमण कर उसे रणजीत सिंह के राज्य में शामिल कर लिया। जमादार खुशहाल सिंह जम्मू का पहला गवर्नर बनाया गया। 1818 ई. में जम्मू गुलाबसिंह को चार लाख रुपये 'अधीनता कर' के बदले में दे दिया।

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