हरि किशन सरहदी  

हरि किशन सरहदी
हरि किशन सरहदी
पूरा नाम शहीद हरि किशन सरहदी
अन्य नाम हरि किशन मल
जन्म 1909
मृत्यु 9 जून, 1931
अभिभावक पिता- गुरुदास मल
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि स्वतंत्रता सेनानी
आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
अन्य जानकारी 23 दिसम्बर, 1930 को दीक्षांत समारोह के अध्यक्ष ज्योफ्रे डी मोरमोरेंसी को दो गोली मारी थीं। जिसके बदले में इन्हें मृत्यु दंड दिया गया।

हरि किशन सरहदी (अंग्रेज़ी: Hari Kishan Sarhadi, जन्म: 1909; शहादत: 9 जून, 1931) भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी थे, जो भारत की आज़ादी की लड़ाई शहीद हो गये।

जीवन परिचय

उत्तर-पश्चिम के सीमांत प्रान्त के मर्दन जनपद के गल्ला ढेर नामक स्थान पर गुरुदास मल के पुत्र रूप में सन 1909 में बालक हरिकिशन का जन्म हुआ था। गुरु दास मल की माँ यानि कि हरिकिशन की दादी माँ बचपन से ही क्रान्तिकारियों के किस्से कहानियों के रूप में बालक हरिकिशन को सुनाया करती थीं। क्रांति का बीज परिवार ने ही बोया। क्रांति बीज को पोषित करके, हरा-भरा करके माँ भारती के कदमो में समर्पित पिता गुरुदास मल ने किया। काकोरी कांड का बड़े लगन व चाव से अध्ययन हरिकिशन ने किया। रामप्रसाद बिस्मिलअशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ हरिकिशन के आदर्श बन गये। दौरान-ए-मुकदमा (असेम्बली बम कांड) भगत सिंह के बयानों ने हरिकिशन के युवा मन को झक झोर दिया। भगत सिंह को हरिकिशन अपना गुरु मानने लगे। यह वह दौर था जब ब्रिटिश हुकूमत द्वारा पूरे देश में क्रान्तिकारियों पर दमन अपने चरम पर था।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 शहीद हरी किशन सरहदी (हिंदी) The Realty of India। अभिगमन तिथि: 23 जून, 2013।

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