पुरुषोत्तम दास टंडन  

पुरुषोत्तम दास टंडन
पुरुषोत्तम दास टंडन
पूरा नाम पुरुषोत्तम दास टंडन
जन्म 1 अगस्त, 1882
जन्म भूमि इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
मृत्यु 1 जुलाई, 1962
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता
आंदोलन 'सविनय अवज्ञा आन्दोलन', 'बिहार किसान आन्दोलन'
जेल यात्रा वर्ष 1930 में महात्मा गाँधी द्वारा चलाये जा रहे 'सविनय अवज्ञा आन्दोलन' के सिलसिले में पुरुषोत्तम जी बस्ती में गिरफ्तार हुए और कारावास का दण्ड मिला।
कार्य काल विधानसभा प्रवक्ता उत्तर प्रदेश- 31 जुलाई, 1937 से 10 अगस्त, 1950 तक
विद्यालय सिटी एंग्लो वर्नाक्यूलर विद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय
शिक्षा एल.एल.बी. और एम.ए.
पुरस्कार-उपाधि 'भारत रत्न' (23 अप्रैल, 1961)
विशेष योगदान पुरुषोत्तम जी हिन्दी के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए काफ़ी प्रयत्न किये थे।
अन्य जानकारी टंडन जी ने 10 अक्टूबर, 1910 को 'नागरी प्रचारिणी सभा', वाराणसी के प्रांगण में 'हिन्दी साहित्य सम्मेलन' की स्थापना की थी।

पुरुषोत्तम दास टंडन (अंग्रेज़ी: Purushottam Das Tandon, जन्म- 1 अगस्त, 1882, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश; मृत्यु- 1 जुलाई, 1962) आधुनिक भारत के प्रमुख स्वाधीनता सेनानियों में से एक थे। वे 'राजर्षि' के नाम से भी विख्यात थे। उन्होंने अपना जीवन एक वकील के रूप में प्रारम्भ किया था। हिन्दी को आगे बढ़ाने और इसे राष्ट्रभाषा का स्थान दिलाने के लिए पुरुषोत्तम दास जी ने काफ़ी प्रयास किये थे। वे हिन्दी को देश की आज़ादी के पहले आज़ादी प्राप्त करने का साधन मानते रहे और आज़ादी मिल जाने के बाद आज़ादी को बनाये रखने का। वर्ष 1950 में वे 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष नियुक्त हुए थे। पुरुषोत्तम दास टंडन को भारत के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में नयी चेतना, नयी लहर, नयी क्रान्ति पैदा करने वाला कर्मयोगी कहा गया है। वर्ष 1961 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से भी सम्मानित किया गया था।

जन्म तथा शिक्षा

पुरुषोत्तम दास टंडन का जन्म 1 अगस्त, 1882 को उत्तर प्रदेश के प्राचीनतम और धार्मिक शहर इलाहाबाद में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय 'सिटी एंग्लो वर्नाक्यूलर विद्यालय' में हुई थी। इसके बाद उन्होंने एल.एल.बी. की डिग्री हासिल की और एम.ए. इतिहास विषय से किया। वर्ष 1906 में वकालत की प्रैक्टिस के लिए पुरुषोत्तम जी ने 'इलाहाबाद उच्च न्यायालय' में काम करना शुरू किया।

विधायी जीवन

पुरुषोत्तम जी के व्यक्तित्व का एक अन्य महत्त्वपूर्ण पक्ष उनका विधायी जीवन था, जिसमें वह आज़ादी के पूर्व एक दशक से भी अधिक समय तक उत्तर प्रदेश की विधानसभा के अध्यक्ष रहे। वे संविधान सभा, लोक सभा और राज्य सभा के भी सदस्य रहे थे। वे समर्पित राजनयिक, हिन्दी के अनन्य सेवक, कर्मठ पत्रकार, तेजस्वी वक्ता और समाज सुधारक थे। 

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हिंदी के कर्ता-धर्ता : भारत रत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन (हिंदी) जागरण जंक्शन। अभिगमन तिथि: 21 जुलाई, 2011
  2. पुरुषोत्तमदास ट्ण्डन की 125वीं जयंती (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 05 जून, 2013।

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