रानी गाइदिनल्यू  

रानी गाइदिनल्यू
रानी गाइदिनल्यू
पूरा नाम रानी गाइदिनल्यू
जन्म 26 जनवरी, 1915
जन्म भूमि मणिपुर, भारत
मृत्यु 17 फ़रवरी, 1993
कर्म भूमि भारत
पुरस्कार-उपाधि पद्मभूषण
प्रसिद्धि स्वतंत्रता सेनानी
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के समान ही वीरतापूर्ण कार्य करने के लिए रानी गाइदिनल्यू को 'नागालैण्ड की रानी लक्ष्मीबाई' कहा जाता है।

रानी गाइदिनल्यू (अंग्रेज़ी: Rani Gaidinliu , जन्म- 26 जनवरी, 1915, मणिपुर, भारत; मृत्यु- 17 फ़रवरी, 1993) भारत की प्रसिद्ध महिला क्रांतिकारियों में से एक थीं। उन्होंने देश को आज़ादी दिलाने के लिए नागालैण्ड में अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों को अंजाम दिया। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के समान ही वीरतापूर्ण कार्य करने के लिए इन्हें 'नागालैण्ड की रानी लक्ष्मीबाई' कहा जाता है। जब रानी गाइदिनल्यू को अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण अंग्रेज़ों ने गिरफ़्तार कर लिया, तब पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कई वर्षों की सज़ा काट चुकीं रानी को रिहाई दिलाने के प्रयास किए। किंतु अंग्रेज़ों ने उनकी इस बात को नहीं माना, क्योंकि वे रानी से बहुत भयभीत थे और उन्हें अपने लिए ख़तरनाक मानते थे।

जन्म तथा स्वभाव

रानी गाइदिनल्यू का जन्म 26 जनवरी, 1915 ई. को भारत के मणिपुर राज्य में पश्चिमी ज़िले में हुआ था। वह बचपन से ही बड़े स्वतंत्र और स्वाभिमानी स्वभाव की थीं। 13 वर्ष की उम्र में ही वह नागा नेता जादोनाग के सम्पर्क में आईं। जादोनाग मणिपुर से अंग्रेज़ों को निकाल बाहर करने के प्रयत्न में लगे हुए थे। वे अपने आन्दोलन को क्रियात्मक रूप दे पाते, उससे पहले ही गिरफ्तार करके अंग्रेज़ों ने उन्हें 29 अगस्त, 1931 को फ़ाँसी पर लटका दिया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

भारतीय चरित कोश |लेखक: लीलाधर शर्मा 'पर्वतीय' |प्रकाशक: शिक्षा भारती, मदरसा रोड, कश्मीरी गेट, दिल्ली |पृष्ठ संख्या: 720 |


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