विचित्र नारायण शर्मा  

विचित्र नारायण शर्मा (जन्म- 10 मई, 1898, गढ़वाल, उत्तरांचल; मृत्यु- 31 मई, 1998) 'जमना लाल बजाज पुरस्कार' से सम्मानित प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ थे।

परिचय

रचनात्मक कार्यों के लिए 'जमना लाल बजाज पुरस्कार' से सम्मानित विचित्र नारायण शर्मा का जन्म 10 मई 1898 को पैतृक गांव नवादा (गढ़वाल-उत्तरांचल) में हुआ था। हाई स्कूल तक उनकी शिक्षा देहरादून में हुई। उसके बाद वे काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्रविष्ट हुए। गांधीजी के असहयोग आंदोलन के आह्वान पर आचार्य कृपलानी के नेतृत्व में (बी. ए. चतुर्थ वर्ष में विद्यालय छोड़कर) असहयोगी बन गए। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम आंदोलनों में भाग लिया और प्रत्येक आंदोलन में गिरफ्तार हुए।[1]

योगदान

विचित्र नारायण शर्मा पढ़ाई छोड़कर खादी के काम से जुड़े और कृपलानी जी के सहयोगी बन कर गांधी आश्रम की स्थापना में उन्होंने अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। इसके बाद वे जीवनपर्यंत स्वतंत्रता संग्राम और खादी ग्राम उद्योग के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करते रहे। पूर्व विधायक और स्वतंत्रता सेनानी के रूप में उन्हं जो पेंशन मिलती थी उसे वे गांधी आश्रम में जमा कर देते थे। आश्रम से उन्हें आजीविका के लिए जो धन मिलता था उसी से अपना काम चलाते थे।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भारतीय चरित कोश |लेखक: लीलाधर शर्मा 'पर्वतीय' |प्रकाशक: शिक्षा भारती, मदरसा रोड, कश्मीरी गेट, दिल्ली |पृष्ठ संख्या: 787 |

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