प्यारेलाल खण्डेलवाल  

प्यारेलाल खण्डेलवाल
प्यारेलाल खण्डेलवाल
जन्म 6 अप्रैल, 1929
जन्म भूमि सीहोर ज़िला, मध्य प्रदेश
मृत्यु 6 अक्टूबर, 2009
मृत्यु स्थान दिल्ली
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि राजनीतिज्ञ
पार्टी 'भारतीय जनता पार्टी'
भाषा हिन्दी, अंग्रेज़ी
जेल यात्रा सत्याग्रह करते हुए दो बार रतलाम और इन्दौर की जेल में रहे।
विशेष योगदान 'भारतीय जनसंघ' और बाद में 'भाजपा' को, विशेषकर मध्य प्रदेश में, मजबूत करने में आपका महत्त्वपूर्ण योगदान था।

प्यारेलाल खण्डेलवाल (अंग्रेज़ी: Pyarelal Khandelwal, जन्म- 6 अप्रैल, 1929, मध्य प्रदेश; मृत्यु- 6 अक्टूबर, 2009, दिल्ली) 'भारतीय जनता पार्टी' के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के सांसद थे। वे आजीवन 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' के प्रचारक रहे थे। 'भारतीय जनसंघ' और फिर उसके बाद भाजपा, विशेषकर मध्य प्रदेश में, के पार्टी संगठन को खड़ा करने में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान था। पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे के बाद प्यारेलाल खण्डेलवाल ही ऐसे व्यक्ति थे, जिनका अविभाजित मध्य प्रदेश में गहन सम्पर्क था। उन्होंने विवाह नहीं किया और आजीवन अविवाहित रहे। कुशाभाऊ ठाकरे के साथ खण्डेलवाल ने भी कार्यकर्ताओं को अंतिम समय तक संयम, धैर्य और सहिष्णुता की सीख देते हुए विचारधारा पर दृढ़ता से खड़े रहने का पाठ पढ़ाया था।

आज़ादी के लिए संघर्ष

प्यारेलाल खण्डेलवाल का जन्म 6 अप्रैल, 1929 को चारमंडली ग्राम, सीहोर ज़िला, मध्य प्रदेश में हुआ था। वे एक साधारण किसान परिवार से सम्बन्ध रखते थे। परतंत्र भारत में जन्म लेने वाले प्यारेलाल जी जब बाल्यावस्था में आये और उन्होंने देखा कि देश अंग्रेज़ों का ग़ुलाम हैं तो वे भारत की आज़ादी के लिए प्रयत्नशील हो उठे। मात्र ग्यारह वर्ष की अवस्था में 1940 में राष्ट्रवादी ध्येयनिष्ट संगठन 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' के संपर्क में आने के बाद उन्हें अपने जीवन का लक्ष्य मिल गया। 'भारत माता' के लिए अपना तन, मन और धन समर्पित करके उन्होंने जीवन समर्पण की भावना रखकर अपने छात्र जीवन में ही सक्रीयता दिखाई। उन्होंने इन्दौर में क्रांतिकारियों और देशभक्तों के समूह, प्रजामंडल द्वारा प्रकाशित गुप्त पर्चों का वितरण एवं माहेश्वरी विद्यालय में विद्यार्थी आन्दोलन को अपना प्रखर नेतृत्व प्रदान करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि अब भारत की युवा शक्ति जागृत हो चुकी है। वन्देमातरम का नारा लगाने पर कठोर यातना और बेतों की सजा मिलने के बावजूद भी प्यारेलाल जी 'भारत माता' की आराधना में निरंतर लगे रहे। इसी के फलस्वरूप आगे चलकर स्वतंत्र भारत की राजनीति को दिशा देने का महत्त्वपूर्ण कार्य इस इंटर पास युवा के हाथों हुआ था।[1]

संघ के प्रचारक

मध्य प्रदेश में 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' के विस्तार से लेकर 'भारतीय जनसंघ' और 'भारतीय जनता पार्टी' की स्थापना में उन्होंने परस्पर पूरक की भूमिका का निर्वहन किया। सन 1948 में संघ के प्रचारक के रूप में ज़िम्मेदारी लेने के बाद प्यारेलाल खण्डेलवाल ने कभी पीछे मुडकर नहीं देखा। 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' का कार्य करते हुए एक वर्ष में ही दो बार शासन की नीतियों के ख़िलाफ़ सत्याग्रह करते हुए दो बार रतलाम और इन्दौर की जेल में भी बंदी रहे। यहाँ स्व. एकनाथ रानाडे जैसे देशभक्त मनीषी का सान्निध्य इन्हें प्राप्त हुआ। संघ कार्य में विभिन्न दायित्वों का निर्वाह करते हुए उन्होंने अनेक स्वयंसेवकों को ध्येय पथ पर अपने देश के लिए पूर्ण समर्पण कर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को यह भी समझाया कि 'स्वयंसेवक' का अर्थ क्या होता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 प्यारेलाल खण्डेलवाल (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 26 सितम्बर, 2012।

संबंधित लेख

और पढ़ें
"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=प्यारेलाल_खण्डेलवाल&oldid=621798" से लिया गया