झाँसी  

झाँसी
झाँसी क़िला
विवरण 'झाँसी' उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक प्रसिद्ध शहरों में से एक है। यह शहर भारतीय इतिहास में काफ़ी महत्त्वपूर्ण रहा है।
राज्य उत्तर प्रदेश
ज़िला झाँसी
स्थापना ओरछा नरेश वीरसिंह बुन्देला
हवाई अड्डा ग्वालियर
रेलवे स्टेशन झाँसी
क्या देखें झाँसी का क़िला, बरुआ सागर, रानी महल, झाँसी संग्रहालय, गणेश मंदिर आदि।
एस.टी.डी. कोड 0510
संबंधित लेख रानी लक्ष्मीबाई, झाँसी का क़िला, वीरसिंह बुन्देला, छत्रसाल
पिन 284001-2-3-4
वाहन पंजीकरण संख्या UP-93
अन्य जानकारी झाँसी के क़िले में स्थित संग्रहालय इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों का मनपसंद स्थान है। क़िला शहर के मध्य स्थित बँगरा नामक पहाड़ी पर निर्मित है।

झाँसी एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक शहर है। 'भारतीय इतिहास' में इसका महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। भारत की वीरांगनाओं में से एक झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता के लिए भी यह शहर जाना जाता है। झाँसी उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है और बुंदेलखंड क्षेत्र के अन्तर्गत आता है। यह एक प्रमुख रेल एवं सड़क केन्द्र है और साथ ही झाँसी ज़िले का प्रशासनिक केन्द्र भी है। झाँसी शहर पत्थर निर्मित क़िले के चारों तरफ़ फ़ैला हुआ है। यह क़िला शहर के मध्य स्थित बँगरा नामक पहाड़ी पर निर्मित है।

इतिहास

9वीं शताब्दी में झॉसी का राज्य खजुराहो के राजपूत चन्देल वंश के राजाओं के अन्तर्गत आया। कृत्रिम जलाशय एवं पहाड़ी क्षेत्र के वास्तुशिल्पिय खण्डहर शायद इसी काल के हैं। चन्देल वंश के बाद उनके सेवक खंगार ने इस क्षेत्र का कार्यभार सम्भाला। क़िले के समीप स्थित करार का क़िला इसी वंश के राजाओं ने बनवाया था। 14वीं शताब्दी के निकट बुन्देलों ने विन्ध्याचंल क्षेत्र से नीचे मैदानी भागों में आना प्रारम्भ किया। वे धीरे-धीरे सारे मैदानी क्षेत्र में फैल गए, जिसे आज बुन्देलखण्ड के नाम से जाना जाता है। झाँसी के क़िले का निर्माण 1613 ई. में ओरछा शासक वीरसिंह बुन्देला ने करवाया था। किवदंती है कि राजा वीरसिंह बुन्देला ने दूर से पहाड़ी पर एक छाया देखी, जिसे बुन्देली भाषा में 'झाँई सी' बोला गया। इसी शब्द के अपभ्रंश से शहर का नाम झाँसी पड़ा।

मराठों द्वारा विकास

17वीं शताब्दी में मुग़लकालीन शासकों के बुन्देला क्षेत्र में लगातार आक्रमण के कारण बुन्देला राजा छत्रसाल ने सन 1732 ई. में मराठों से सहायता माँगी। 1734 ई. में छत्रसाल के निधन के बाद बुन्देला क्षेत्र का एक तिहाई भाग मराठों को दे दिया गया। मराठों ने इस शहर का विकास किया और इसके लिए ओरछा से लोगों को लाकर यहाँ बसाया। सन 1806 ई. में मराठा शक्ति के निर्बल होने पर ब्रिटिश राज तथा मराठों के मध्य एक समझौता हुआ, जिससे मराठों ने ब्रिटिश साम्राज्य का प्रभुत्व स्वीकार कर लिया। 1817 ई. में मराठों ने बुन्देलखण्ड क्षेत्र के सारे अधिकार ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी को दे दिए।

ब्रिटिश साम्राज्य में विलेय

सन 1857 ई. में झाँसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु हो गयी। तत्कालीन अंग्रेज़ गवर्नर-जनरल ने झाँसी को पूरी तरह से अपने अधिकार में ले लिया। गंगाधर राव की विधवा रानी लक्ष्मीबाई ने इसका विरोध किया और कहा कि "राजा गंगाधर राव के दत्तक पुत्र को राज्य का उत्तराधिकारी माना जाये।" परन्तु ब्रिटिश राज ने इसे मानने से इंकार कर दिया। इन्हीं परिस्थितियों के चलते झाँसी में सन 1857 ई. का संग्राम हुआ, जो कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिये नींव का पत्थर सिद्ध हुआ। जून 1857 ई. में 12वीं पैदल सेना के सैनिकों ने झाँसी पर कब्जा कर लिया और क़िले में मौजूद ब्रिटिश अधिकारियों को मार डाला। ब्रिटिश साम्राज्य से जंग के दौरान रानी लक्ष्मीबाई ने स्वयं सैन्य संचालन किया। किन्तु रानी की मृत्यु के बाद 1858 ई. में झाँसी को पुन: ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया। बाद में झाँसी के अधिकार ग्वालियर के राजा को दे दिये गए। सन 1886 ई. में झाँसी को यूनाइटेड प्रोविंस में जोड़ा गया, जो देश की आज़ादी के बाद 1956 में उत्तर प्रदेश बना।

संबंधित लेख

भारत के नगरउत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थल
और पढ़ें
"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=झाँसी&oldid=545768" से लिया गया