गोरखपुर  

गोरखपुर
गोरखनाथ मंदिर
विवरण गोरखपुर भारत में उत्तर प्रदेश प्रान्त के पूर्वी नेपाल के सीमा के पास एक नगर है।
राज्य उत्तर प्रदेश
ज़िला गोरखपुर
भौगोलिक स्थिति 26° 45′ 31.68″ उत्तर, 83° 22′ 10.92″ पूर्व
मार्ग स्थिति लखनऊ से 265 किमी पूरब में राष्ट्रीय राजमार्ग 28 पर स्थित है।
हवाई अड्डा गोरखपुर हवाई अड्डा
रेलवे स्टेशन गोरखपुर स्टेशन
यातायात रेल, बस, टॅक्सी
संबंधित लेख गोरखनाथ, चौरी चौरा, राम प्रसाद बिस्मिल, राप्ती नदी,
पर्यटन स्थल गोरखनाथ मंदिर, गीताप्रेस गोरखपुर, रामगढ़ ताल
भाषाएँ हिन्दी, भोजपुरी
अन्य जानकारी गोरखपुर का नाम एक प्रसिद्ध तपस्वी तप संत गोरक्षनाथ के नाम पर था। प्राचीन समय में गोरखपुर के भौगोलिक क्षेत्र में बस्ती, देवरिया, कुशीनगर, आज़मगढ़ के आधुनिक ज़िले शामिल थे।

गोरखपुर (अंग्रेज़ी:Gorakhpur, उर्दू: گورکھپور) भारत में उत्तर प्रदेश प्रान्त के पूर्वी नेपाल के सीमा के पास एक नगर है। गोरखपुर, पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय भी है। यहाँ एक दीनदयाल विश्वविद्यालय, अनेक महाविद्यालय, मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज, बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज तथा सैकड़ों अन्य विद्यालय हैं। गोरखपुर से सटे पूरब में एक बहुत ही सुन्दर वन है जिसका नाम कुसुमी जंगल है। गोरखपुर में भारतीय वायुसेना की छावनी भी है। स्वतन्त्रता के समय यह जनपद बहुत बड़ा था, जिसमें आज के देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज आदि भी सम्मिलित थे। ऐतिहासिक रूप से गोरखपुर बहुत प्रसिद्ध है। 20 वीं सदी में, गोरखपुर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक केंद्र बिन्दु था। राम प्रसाद बिस्मिल, बन्धु सिंह व चौरीचौरा आन्दोलन के शहीदों की शहादत स्थली चौरी चौरा नामक ऐतिहासिक स्थल गोरखपुर जनपद में ही है। पुराने शहर से 15 कि.मी. दूर एक औद्योगिक GIDA (गोरखपुर विकास प्राधिकरण) क्षेत्र है। राप्ती नदी गोरखपुर से होकर बहती है। गोरखपुर के जनसामान्य की भाषा भोजपुरी है, किन्तु आजकल नगर के लोग घर से बाहर दूसरों से हिन्दी में बात करना अधिक पसन्द करते हैं।[1] उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में गोरखपुर, बाबा गोरखनाथ के नाम से सुविख्यात अनेक पुरातात्विक, अध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों को समेटे हुए है। महावीर, करुणावतार गौतम बुद्ध, संत कवि कबीरदास एवं गुरु गोरक्षनाथ ने जनपद के गौरव को राष्ट्रीय व अन्तराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्थापित किया। हस्तकला ‘टेराकोटा’ के लिए प्रसिद्ध व आधुनिक गोरखपुर का वर्तमान स्वरूप, मूलभूत सुविधा सम्पन्न, पर्यटकों को आकर्षित करता है। विगत वर्षों से गोरखपुर जनपद विकास के पथ पर अग्रसर है।[2]

इतिहास

शहर और गोरखपुर ज़िले का नाम एक प्रसिद्ध तपस्वी तप संत गोरक्षनाथ के नाम पर था, प्राचीन समय में गोरखपुर के भौगोलिक क्षेत्र में बस्ती, देवरिया, कुशीनगर, आज़मगढ़ के आधुनिक ज़िले शामिल थे। गोरखपुर, उत्तर प्रदेश राज्य की राप्ती नदी के बाँए किनारे पर बसा हुआ है। हिमालय की तराई में समुद्र की सतह से 150 मीटर की ऊँचाई पर, राप्ती, रोहिणी नदियों के संगम पर स्थित गोरखपुर 'महायोगी गोरक्षनाथ' की पावन कर्मभूमि रही है। भगवान बुद्ध जिनका जन्म लुम्बिनी में व निर्वाण कुशीनगर में हुआ, का यह कर्मक्षेत्र व पथक्षेत्र रहा है। यह वह क्षेत्र है जिसमें संत कबीर, मुंशी प्रेमचन्द्र, फ़िराक़ गोरखपुरी जैसे विश्व प्रसिद्ध संत, लेखक व शायर हुए हैं। सम्पूर्ण विश्व को धार्मिक साहित्य श्रीमद्भागवत गीता का प्रचार प्रसार करने वाली, भारतीय संस्कृति, धर्म, कला एवं दर्शन की गरिमा को सन्निहित करने के प्रयास में कार्यरत, स्व. जय दयाल जी गोयंका के स्वप्न को मूर्त रूप देने हेतु परम पूज्य स्व. हनुमान प्रसाद पोद्दार जी के अथक प्रयास से स्थापित 'गीता प्रेस' भी इसी महानगर की पहचान है। वर्तमान में नगर के पूरब में कुसुम्ही जंगल, पश्चिम में अजवनिया नाला, दक्षिण में राप्ती नदीरामगढ़ ताल तथा उईन्नार में रोहिणी नदी से निर्मित महेसरा - चिलुआताल चिह्नांकित करता है। गोरखपुर महानगर की आबादी वर्तमान में लगभग 6 लाख 25 हज़ार एवं क्षेत्रफल लगभग 147 वर्ग किलोमीटर है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. गोरखपुर : परिचय (हिन्दी) (पी.एच.पी) गोरखपुर... शहर की धड़कन। अभिगमन तिथि: 7 जनवरी, 2011।
  2. गोरखपुर (हिन्दी) (पी.एच.पी) आधिकारिक वेबसाइट। अभिगमन तिथि: 7 जनवरी, 2011।
  3. सामान्य जानकारियां (हिन्दी) (पी.एच.पी) नगर निगम गोरखपुर। अभिगमन तिथि: 07 जनवरी, 2011।

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