सिकंदरा आगरा  

सिकंदरा, आगरा
Sikandra, Agra

अकबर का मक़बरा आगरा से 4 किलोमीटर की दूरी पर सिकंदरा में स्थित है। वर्तमान में जहाँ सिकंदरा है, वहाँ सिकन्दर की सेना का पड़ाव था। उसी के नाम पर इस जगह का नाम 'सिकंदरा' पड़ा। सिकंदर के आक्रमण से पहले आगरा एक छोटा सा नगर था। सिकंदरा में मक़बरे का निर्माण कार्य स्‍वयं अकबर ने शुरू करवाया था, लेकिन इसके पूरा होने से पहले ही अकबर की मृत्‍यु हो गई। बाद में उनके पुत्र जहाँगीर ने इसे पूरा करवाया। जहाँगीर ने मूल योजना में कई परिवर्तन किए। इस इमारत को देखकर पता चलता है कि, मुग़ल कला कैसे विकसित हुई। मुग़लकला निरंतर विकसित होती रही है। पहले दिल्ली में हुमायूँ का मक़बरा, फिर अकबर का मक़बरा और अंतत: ताजमहल का निर्माण हुआ। मक़बरे के चारों ओर ख़ूबसूरत बगीचा है, जिसके बीच में 'बरादी महल' है, जिसका निर्माण सिकन्दर लोदी ने करवाया था।[1]

अकबर

अकबर हुमायूँ का बेटा और बाबर का पोता था। वह मुग़ल वंश का और मध्यकालीन भारत के इतिहास का महानतम बादशाह था। उसने 1556 से 1605 ई. तक राज्य किया। उसने एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की, जो काबुल से आसाम और कश्मीर से अहमदनगर तक विस्तीर्ण था। उसका राज्य विधर्मी प्रजा के प्रति शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व के ठोस सिद्धान्त पर चलता था, और राजतंत्र मनसबदारी जैसे धर्मनिरपेक्ष संस्थानों पर आधारित था। उसने युद्धरत राजपूत राजाओं को मुग़ल छत्र के नीचे एकत्र किया और देश को एक-सी सांस्कृतिक, राजनीतिक और प्रशासकीय व्यवस्था के अन्तर्गत जोड़ दिया। उसने अपना राजत्व शाखामूल भारतीय भूमि से सम्बद्ध कर दिया और उसे विशुद्ध देशी बना दिया। इसलिए उसे ‘चक्रवर्ती’ का सम्मानसूचक विरुद प्रदान किया गया। उसने भीड़ में से एक राष्ट्र का निर्माण किया। इसी कारण उसे अकबर महान कहा गया।

मक़बरे का निर्माण

सम्राट अकबर एक महान् निर्माता भी था, और उसने अपने सारे साम्राज्य में क़िलों की एक शृंखला बनवाई थी। उसने फ़तेहपुर सीकरी की स्थापना की, जिसमें उसने अपनी छाप की मिश्रित शैली में सुन्दर महल बनवाये। वह वहाँ 13 वर्ष (1572 से 1585 ई. तक) रहा। उसने आगरे के क़िले का पुनर्निर्माण कराया और इसमें अनेकानेक राजकीय इमारतें बनवाईं। उसने अपने मक़बरे की भी स्वयं ही योजना बनाई और उसके लिये सिकन्दरा में यमुना नदी के तट के समीप एक स्थान पसन्द किया। उसका नाम ‘बिहिश्ताबाद’ (स्वर्गिक आवास) हो गया। अकबर की 1605 ई. में मृत्यु हुई। तब मक़बरे का बनना आरम्भ ही हुआ था। इसे उसके बेटे जहाँगीर ने 1612 ई. में अकबर के मूल डिज़ाइन के अनुसार ही पूर्ण कराया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. सिकंदरा (हिन्दी) यात्रा सलाह। अभिगमन तिथि: 6 दिसंबर, 2010

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