रूमी दरवाज़ा लखनऊ  

रूमी दरवाज़ा लखनऊ
रूमी दरवाज़ा
विवरण अवध वास्तुकला के प्रतीक इस दरवाज़े को तुर्किश गेटवे कहा जाता है।
राज्य उत्तर प्रदेश
नगर लखनऊ
निर्माता आसफ़उद्दौला
निर्माण 1786 ई.
वास्तुकार किफ़ायतउल्ला
वास्तु शैली रूमी दरवाज़े की ऊंचाई 60 फीट है। इसके सबसे ऊपरी हिस्से पर एक अठपहलू छतरी बनी हुई है, जहां तक जाने के लिए रास्ता है। पश्चिम की ओर से रूमी दरवाज़े की रूपरेखा त्रिपोलिया जैसी है जबकि पूर्व की ओर से यह पंचमहल मालूम होता है।
Map-icon.gif गूगल मानचित्र
भौगोलिक निर्देशांक 26° 51′ 38″ उत्तर, 80° 54′ 57″ पूर्व
अन्य जानकारी रूमी दरवाज़ा जब बन रहा था उस वक्त अवध में अकाल पड़ा हुआ था, लोगों को रोज़गार मिल सके इसलिए आसफ़उद्दौला ने इन इमारतों की विस्तृत योजना बनाई थी।

रूमी दरवाज़ा लखनऊ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। लखनऊ का यह भवन विश्व पटल पर अपनी एक अलग पहचान रखता है। नवाब आसफ़उद्दौला ने सन‍् 1775 में लखनऊ को अपनी सल्तनत का केंद्र बना लिया था। यह दरवाज़ा जनपद लखनऊ का हस्ताक्षर शिल्प भवन है। अवध वास्तुकला के प्रतीक इस दरवाज़े को तुर्किश गेटवे कहा जाता है।

इतिहास

सन् 1784 में नवाब आसफ़उद्दौला ने रूमी दरवाज़ा और इमामबाड़ा बनवाना शुरू कर दिया था। इनका निर्माण कार्य सन् 1786 में पूरा हुआ। कहते हैं इनके निर्माण में उस ज़माने में एक करोड़ की लागत आई थी।

रूमी दरवाज़ा जब बन रहा था उस वक्त अवध में अकाल पड़ा हुआ था, लोगों को रोज़गार मिल सके इसलिए आसफ़उद्दौला ने इन इमारतों की विस्तृत योजना बनाई थी।
रूमी दरवाज़ा, लखनऊ (1814-15)

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