विजय सिंह पथिक  

विजय सिंह पथिक
विजय सिंह पथिक पर जारी डाक टिकट
पूरा नाम विजय सिंह पथिक
अन्य नाम भूपसिंह गुर्जर
जन्म 27 फ़रवरी, 1882
जन्म भूमि गुलावठी कलाँ, ज़िला बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश
मृत्यु 28 मई, 1954
मृत्यु स्थान मथुरा, उत्तर प्रदेश
अभिभावक हमीर सिंह और कमल कुमारी
पति/पत्नी जानकी देवी
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि स्वतंत्रता सेनानी
धर्म हिन्दू
आंदोलन बिजोलिया किसान आन्दोलन
विशेष योगदान सन 1920 में पथिक जी के प्रयत्नों से ही अजमेर में 'राजस्थान सेवा संघ' की स्थापना हुई। 1921 के आते-आते पथिक जी ने 'राजस्थान सेवा संघ' के माध्यम से बेगू, पारसोली, भिन्डर, बासी और उदयपुर में शक्तिशाली आन्दोलन किए।
संबंधित लेख रासबिहारी बोस, शचीन्द्रनाथ सान्याल, महात्मा गाँधी
अन्य जानकारी विजय सिंह पथिक ने बम्बई यात्रा के समय गाँधीजी की पहल पर यह निश्चय किया गया था कि वर्धा से 'राजस्थान केसरी' नामक समाचार पत्र निकाला जाये। यह पत्र सारे देश में लोकप्रिय हो गया था।

विजय सिंह पथिक (अंग्रेज़ी: Vijay Singh Pathik; जन्म- 27 फ़रवरी, 1882, ज़िला बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश; मृत्यु- 28 मई, 1954, मथुरा) भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले वीर क्रांतिकारियों में से एक थे। इनके ऊपर अपनी माँ और परिवार की क्रान्तिकारी व देशभक्ति से परिपूर्ण पृष्ठभूमि का बहुत गहरा असर पड़ा था। विजय सिंह पथिक अपनी युवावस्था में ही रासबिहारी बोस और शचीन्द्रनाथ सान्याल जैसे अमर क्रान्तिकारियों के सम्पर्क में आ गए थे। वैसे विजय सिंह पथिक जी का मूल नाम 'भूपसिंह' था, किंतु 'लाहौर षड़यंत्र' के बाद उन्होंने अपना नाम बदल कर विजय सिंह पथिक रख लिया और फिर अपने जीवन के अंत समय तक वे इसी नाम से जाने जाते रहे। महात्मा गाँधी के 'सत्याग्रह आन्दोलन' से बहुत पहले ही पथिक जी ने 'बिजोलिया किसान आन्दोलन' के नाम से किसानों में स्वतंत्रता के प्रति अलख जगाने का कार्य प्रारम्भ कर दिया था।

जन्म तथा परिवार

स्वतंत्रता सेनानी विजय सिंह पथिक का जन्म 27 फ़रवरी, 1882 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ज़िले के गुलावठी कलाँ नामक ग्राम में हुआ था। ये गुर्जर परिवार से सम्बंधित थे। इनके पिता का नाम हमीर सिंह तथा माता का नाम कमल कुमारी था। इनके दादा इन्द्र सिंह बुलन्दशहर में मालागढ़ रियासत के दीवान थे, जिन्होंने 1857 के 'प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम' में अंग्रेज़ों से लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की थी। पथिक जी के पिता हमीर सिंह गुर्जर को भी क्रान्ति में भाग लेने के आरोप में ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार किया था। विजय सिंह पथिक पर उनकी माँ कमल कुमारी और परिवार की क्रान्तिकारी व देशभक्ति से परिपूर्ण पृष्ठभूमि का बहुत गहरा असर पड़ा था।[1]

विवाह

लगभग 48 वर्ष की आयु में विजय सिंह पथिक ने एक विधवा अध्यापिका जानकी देवी से विवाह किया। उन्होंने अभी गृहस्थ जीवन शुरू किया ही था कि एक माह बाद ही अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण वे गिरफ़्तार कर लिए गये। उनकी पत्नी जानकी देवी ने ट्यूशन आदि करके किसी प्रकार से घर का खर्च चलाया। पथिक जी को इस बात का मरते दम तक अफ़सोस रहा था कि वे 'राजस्थान सेवा आश्रम' को अधिक दिनों तक चला नहीं सके और अपने मिशन को अधूरा छोड़ कर चले गये।

नाम परिवर्तन

अपनी युवावस्था में ही पथिक जी का सम्पर्क रासबिहारी बोस और शचीन्द्रनाथ सान्याल जैसे प्रसिद्ध देशभक्त क्रान्तिकारियों से हो गया था। यद्यपि इनका मूल नाम भूपसिंह था, लेकिन 1915 के 'लाहौर षड्यन्त्र' के बाद उन्होंने अपना नाम बदल कर विजयसिंह पथिक रख लिया। इसके बाद वे अपनी मृत्यु पर्यन्त तक इसी नाम से जाने गए। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के 'सत्याग्रह आन्दोलन' से बहुत पहले ही उन्होंने 'बिजोलिया किसान आन्दोलन' के नाम से किसानों में स्वतंत्रता के प्रति अलख जगाने का काम किया था।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 राजस्थान के स्वतंत्रता सेनानी (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 04 मई, 2014।
  2. एक किस्सा नायाब- विप्लवी विजयसिंह ‘पथिक’ -मथुरा में गुमनामी रहे (हिन्दी) tennews.in। अभिगमन तिथि: 24 अगस्त, 2018।

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