भोगराजू पट्टाभि सीतारामैया  

भोगराजू पट्टाभि सीतारामैया
पट्टाभि सीतारामैया
पूरा नाम भोगराजू पट्टाभि सीतारामैया
जन्म 24 दिसम्बर, 1880
जन्म भूमि नेल्लौर तालुका, आन्ध्र प्रदेश
मृत्यु 17 दिसम्बर, 1959
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि स्वतंत्रता सेनानी, लेखक व पत्रकार
धर्म हिन्दू
आंदोलन 'असहयोग आन्दोलन' में भाग लिया
जेल यात्रा 1930, 1932 और 1942 में जेल की सजाएँ भोगीं
विद्यालय 'मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज'
शिक्षा बी. ए.
विशेष योगदान देशी रियासतों में राष्ट्रीय जाग्रति लाने में आपका बड़ा योगदान था।
अन्य जानकारी सीतारामैयाजी 1948 की जयपुर कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए थे। वे 1952 से 1957 तक वे मध्य प्रदेश के राज्यपाल भी रहे।

भोगराजू पट्टाभि सीतारामैया (अंग्रेज़ी: Bhogaraju Pattabhi Sitaramayya; जन्म- 24 दिसम्बर, 1880, आन्ध्र प्रदेश; मृत्यु- 17 दिसम्बर, 1959) भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, गाँधीवादी और पत्रकार थे। इन्होंने दक्षिण भारत में स्वतंत्रता की अलख जगाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आपने राष्ट्रीय हितों को दूसरे हितों के मुकाबले हमेशा प्राथमिकता में रखा। सीतारामैया राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के प्रमुख सहयोगियों में से एक थे। जब सन 1939 में कांग्रेस अध्यक्ष के निर्वाचन में पट्टाभि सीतारामैया सुभाषचन्द्र बोस से पराजित हो गए, तब महात्मा गाँधी ने उनकी हार को अपनी हार कहा था। भारत की आज़ादी के बाद वर्ष 1952 से 1957 तक वे मध्य प्रदेश राज्य के राज्यपाल रहे थे। सीतारामैया एक लेखक के तौर पर भी जाने जाते थे। उन्होंने 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' का इतिहास भी लिखा था।

जन्म तथा शिक्षा

पट्टाभि सीतारामैया का जन्म 24 दिसम्बर, 1880 ई. को आंध्र प्रदेश के नेल्लौर तालुके में एक निर्धन परिवार में हुआ था। उनके पिता आठ रुपये प्रति महीने के वेतन पर गृहस्थी चलाते थे। जब सीतारामैया चार-पाँच वर्ष के थे, तभी इनके पिता का देहांत हो गया। अनेक कठिन परिस्थितियों के आने पर भी उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी। उन्होंने अपनी बी.ए. की डिग्री 'मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज' से प्राप्त की। काकीनाड़ा के एक धनी वकील की कन्या से उनका विवाह हुआ। इसके बाद उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई पूरी की और मछलीपट्टम में चिकित्स के रूप में व्यवसायिक जीवन में लग गए।

कांग्रेस से सम्पर्क

राष्ट्रीयता की भावना उनके अंदर आरंभ से ही विद्यमान थी। 'बंग भंग' के विरुद्ध देशव्यापी आंदोलन का उन पर प्रभाव पड़ा था। कॉलेज के दिनों से ही वे कांग्रेस के समर्क में आ चुके थे। राष्ट्रीय विचारों के प्रचार के लिए उन्होंने 'जन्मभूमि' नामक एक साहित्यिक पत्र भी निकाला था। सन 1916 से 1952 तक वे 'अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी' के और अनेक बार कार्य समिति के सदस्य भी रहे।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=भोगराजू_पट्टाभि_सीतारामैया&oldid=615846" से लिया गया