पेरिन बेन कैप्टन  

पेरिन बेन कैप्टन
पेरिन बेन कैप्टन
पूरा नाम पेरिन बेन कैप्टन
जन्म 12 अक्टूबर, 1888
जन्म भूमि कच्छ, गुजरात
मृत्यु 1958
अभिभावक पिता- अर्देशिर
पति/पत्नी धुनजीशा एस. कैप्टेन
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि स्वतंत्रता सेनानी
अन्य जानकारी सन 1921 में पेरिन बेन कैप्टन ने गांधीवादी आदर्शों पर आधारित औरतों के अभियान, राष्ट्रीय स्त्री सभा के गठन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पेरिन बेन कैप्टन (अंग्रेज़ी: Perin Ben Captain, जन्म- 12 अक्टूबर, 1888; मृत्यु- 1958) भारतीय महिला स्वतंत्रता सेनानी थीं। भारतीय स्वतंत्रता के लिए बहुत से लोगों ने अपना जीवन समर्पित किया । यदि कभी अतीत के पन्नों को खंगाला जाये तो ऐसी बहुत-सी भूली-बिसरी कहानियां मिलेंगी, जिनके बारे में इतिहासकार शायद लिखना भूल गये, ख़ासकर महिला स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में। चंद महिला स्वतंत्रता सेनानिओं के अलावा शायद ही किसी के बारे में ज्यादा जाना व पढ़ा न गया हो। ऐसी ही कहानी है दादाभाई नौरोजी की पोती पेरिन बेन कैप्टेन की, जो शायद इतिहास की स्मृतियों से कहीं खो सी गयी है।

परिचय

12 अक्टूबर, 1888 को गुजरात के कच्छ जिले के मांडवी में जन्मीं पेरिन बेन, दादाभाई नौरोजी के सबसे बड़े बेटे अर्देशिर की सबसे बड़ी बेटी थीं। उनके पिता एक डॉक्टर थे। बहुत कम उम्र में ही पेरिन ने अपने पिता को खो दिया था। साल 1893 में, जब वे महज पांच साल की थी तो उनके पिता की मृत्यु हो गयी थी। घर में हमेशा से पढ़ाई-लिखाई के माहौल के चलते पेरिन का झुकाव भी शिक्षा की तरफ़ था। उनकी शुरूआती पढ़ाई बॉम्बे (अब मुंबई) से हुई। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए फ्रांस चली गयी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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