वामन जयन्ती  

(वामन द्वादशी से पुनर्निर्देशित)


वामन जयन्ती
वामन अवतार
विवरण 'वामन जयंती' हिन्दुओं के प्रमुख देवताओं में से एक भगवान विष्णु के वामन अवतार के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। विश्वास किया जाता है कि इसी दिन भगवान ने वामन अवतार लिया था।
अन्य नाम वामन द्वादशी
तिथि भाद्रपद मास, शुक्ल पक्ष की द्वादशी। जबकि सनातन धर्म के अनुसार चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को वामन द्वादशी मनायी जाती है।
अनुयायी हिन्दू व प्रवासी भारतीय हिन्दू
सम्बन्धित देवता विष्णु
धार्मिक मान्यता इस दिन व्रत एवं पूजन करने से भगवान वामन प्रसन्न होते हैं और भक्तों की समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।
संबंधित लेख विष्णु, वामन अवतार, अवतार
अन्य जानकारी वामन अवतारी भगवान विष्णु राजा बलि से तीन पग भूमि का दान माँगते हैं। वामन रूप में भगवान एक पग में स्वर्गादि उर्ध्व लोकों को ओर दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लेते हैं। तीसरा पग भगवान बलि के सिर पर रखते हैं।

वामन जयंती भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मनाई जाती है। जबकि सनातन धर्म के अनुसार चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को वामन द्वादशी मनायी जाती है।[1] द्वादशी तिथि के दिन मनाये जाने के कारण ही इसे 'वामन द्वादशी' भी कहा जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी शुभ तिथि को श्रवण नक्षत्र के अभिजित मुहूर्त में भगवान श्रीविष्णु के एक रूप भगवान वामन का अवतार हुआ था। इस तिथि पर मध्याह्न के समय भगवान का वामन अवतार हुआ था, उस समय श्रवण नक्षत्र था।[2] भागवत पुराण[3] में ऐसा आया है कि वामन श्रावण मास की द्वादशी पर प्रकट हुए थे, जबकि श्रवण नक्षत्र था, मुहूर्त अभिजित था तथा वह तिथि विजयद्वादशी कही जाती है।

पूजन विधि

इस दिन प्रात:काल भक्तों को श्रीहरि का स्मरण करने नियमानुसार विधि विधान के साथ पूजा कर्म करना चाहिए। भगवान वामन को पंचोपचार अथवा षोडषोपचार पूजन करने के पश्चात् चावल, दही इत्यादि वस्तुओं का दान करना उत्तम माना गया है। संध्या के समय व्रती को भगवान वामन का पूजन करना चाहिए और व्रत कथा सुननी चाहिए तथा समस्त परिवार वालों को भगवान का प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। इस दिन व्रत एवं पूजन करने से भगवान वामन प्रसन्न होते हैं और भक्तों की समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. वामन द्वादशी की कथा एवम इतिहास (हिंदी) hindumythology.org। अभिगमन तिथि: 02 फ़रवरी, 2017।
  2. सर्वपापमोचन; गदाधरपद्धति (कालसार, पृष्ठ 147-148); व्रतार्क (पाण्डुलिपि, 244ए से 247ए तक, भविष्योत्तरपुराण से उद्धरण
  3. भागवतपुराण (8, अध्याय 17-23)। अध्याय 18 (श्लोक 5-6
  4. वामन जयंती (हिंदी) (एच.टी.एम.एल) समग्र उन्ननयन (ब्लॉग)। अभिगमन तिथि: 13 जनवरी, 2013।

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