भीष्माष्टमी  

भीष्माष्टमी
भीष्म
विवरण 'भीष्माष्टमी' हिन्दू धर्म में मान्य प्रमुख व्रत संस्कारों में से एक है। यह व्रत महाभारत के प्रसिद्ध पात्र पितामह भीष्म से सम्बंधित है।
तिथि माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि
अनुयायी हिन्दू
महत्त्व इस दिन भीष्म के नाम से पूजन और तर्पण करने से वीर और सत्यवादी संतान की प्राप्ति होती है।
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बाहरी कड़ियाँ व्रती को भीष्माष्टमी व्रत को करने के साथ-साथ इस दिन भीष्म पितामह की आत्मा की शान्ति के लिये तर्पण भी करना चाहिए।

भीष्माष्टमी अथवा 'भीष्म अष्टमी' का व्रत माघ माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है। महाभारत में वर्णन है कि भीष्म पितामह को इच्छामृत्यु का वरदान था। माघ शुक्लाष्टमी तिथि को बाल ब्रह्मचारी भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर अपने प्राण छोड़े थे। उनकी पावन स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन प्रत्येक हिन्दू को भीष्म पितामह के निमित्त कुश, तिल, जल लेकर तर्पण करना चाहिए, चाहे उसके माता-पिता जीवित ही क्यों न हों।

व्रत-विधि

इस दिन प्रातः नित्य कर्म से निवृत्त होकर यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी या सरोवर के तट पर स्नान करें। अन्यथा घर पर ही विधिपूर्वक स्नान कर भीष्म पितामह के निमित्त हाथ में तिल, जल आदि लेकर अपसव्य (दाहिने कंधे पर जनेऊ करें, यज्ञोपवीत न हो तो उत्तरीय अर्थात् गमछे को दाहिने रखने का विधान है) और दक्षिणाभिमुख होकर निम्न मंत्रों से तर्पण करें-

वैयाघ्रपादगोत्राय सांकृत्यप्रवराय च ।

गङ्गापुत्राय भीष्माय सर्वदा ब्रह्मचारिणे ॥ भीष्मः शान्तनवो वीरः सत्यवादी जितेन्द्रियः ।

आभिरद्भिरवाप्नोतु पुत्रपौत्रोचितां क्रियाम् ॥

यह तर्पण दाहिने हाथ पर बने पितृतीर्थ द्वारा अंजलि देकर करें अर्थात् उपरोक्त मंत्रों को पढ़ते हुए तिल-कुश युक्त जल को तर्जनी और अंगूठे के मध्य भाग से होते हुए पात्र पर छोड़ें। इसके बाद पुनः सव्य (वापस पहले की तरह बायें कंधे पर जनेऊ कर लें) होकर निम्न मंत्र से गंगापुत्र भीष्म को अर्घ्य देना चाहिये[1]-

वसूनामवताराय शन्तनोरात्मजाय च । अर्घ्य ददामि भीष्माय आबालब्रह्मचारिणे ॥

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भीष्माष्टमी पर करें भीष्म तर्पण (हिंदी) ourhindudharm.blogspot.in। अभिगमन तिथि: 4 फ़रवरी, 2017।
  2. भीष्माष्टमी (हिंदी) readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com। अभिगमन तिथि: 4 फ़रवरी, 2017।
  3. हेमाद्रि (काल, 628-629; वर्षक्रियाकौमुदी 503; तिथितत्त्व 58; निर्णयसिन्धु 221; समयमयूख 61
  4. समयमयूख 61
  5. अनुशासन पर्व महाभारत 167|28
  6. जे. ए. एस. बी. (जिल्द 20, संख्या 1, पत्र, पृ. 39-41, 1954 ई.)
  7. भुजबलनिबन्ध(पृ. 364

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