सुकृत द्वादशी

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  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी पर उपवास किया जाता है।
  • द्वादशी पर विष्णु पूजा की जाती है।
  • एकादशी को दिन एवं रात्रि में 'नमो नारायण' का जप करना चाहिए।
  • कर्ता द्वारा क्रोध, ईर्ष्या, लोभ, शठता आदि का त्याग करना चाहिए।
  • 'यह संसार व्यर्थ है' का स्मरण करना चाहिए।
  • यह विधि द्वादशी को भी करनी चाहिए।
  • एक वर्ष तक प्रतिमास करना चाहिए।
  • अन्त में हरि की स्वर्ण प्रतिमा की पूजा एवं एक गाय के साथ उसका दान करना चाहिए।
  • कर्ता नरक का दर्शन नहीं करता है।[1]

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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हेमाद्रि (व्रतखण्ड 1, 1079-1081, विष्णुधर्मोत्तरपुराण से उद्धरण

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