पुत्रदा एकादशी  

पुत्रदा एकादशी
विष्णु पूजा
अनुयायी हिंदू
उद्देश्य संतान की ईच्छा रखने वाले निःसंतान व्यक्ति को इस व्रत को करने से पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।
प्रारम्भ पौराणिक काल
तिथि श्रावण शुक्ल पक्ष एकादशी
उत्सव सारा दिन भगवान विष्णु का भजन कीर्तन कर रात्रि में भगवान की मूर्ति के समीप ही शयन करना चाहिए।
अन्य जानकारी इस एकादशी का महत्व पुराणों में भी वर्णित है।

पुत्रदा एकादशी का हिन्दू धर्म में बड़ा ही महत्त्व है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'पुत्रदा एकादशी' कहा जाता है। इस एकादशी का महत्व पुराणों में भी वर्णित है।

व्रत और विधि

इस व्रत के दिन व्रत रहकर भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए। उसके बाद वेदपाठी ब्राह्मणों को भोजन कराकर, दक्षिणा देकर उनका आर्शीवाद प्राप्त करना चाहिए। सारा दिन भगवान का भजन कीर्तन कर रात्रि में भगवान की मूर्ति के समीप ही शयन करना चाहिए। भक्तिपूर्वक इस व्रत को करने से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। संतान की ईच्छा रखने वाले निःसंतान व्यक्ति को इस व्रत को करने से पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। अतः संतान प्राप्ति की ईच्छा रखने वालों को इस व्रत को श्रद्धापूर्वक अवश्य ही करना चाहिए।

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