राधा-कृष्ण  

राधा-कृष्ण को हिन्दू धर्म में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। सम्पूर्ण भारत में सभी स्थानों पर इनकी पूजा-अर्चना की जाती है और सभी देवी-देवताओं में एक विशेष स्थान दिया जाता है। राधा-कृष्ण की अलौकिक प्रेम कहानी से हर कोई परिचित है। उन दोनों का मिलना और फिर मिलकर बिछड़ जाना, शायद यही उन दोनों की नियति थी। पौराणिक कथाओं में कृष्ण को रासलीला करते दर्शाया गया है। उन्हें एक प्रेमी और कुशल कूटनीतिज्ञ के रूप में प्रदर्शित किया गया है। वहीं राधा को हर समय कृष्ण के प्रेम में डूबी हुई प्रेमिका के तौर पर वर्णित किया गया है।

परिचय

कृष्ण वसुदेव और देवकी की आठवीं संतान थे। मथुरा के राजा कंस द्वारा उनकी हत्या न कर दी जाये, इसीलिए जन्म लेते ही उन्हें मथुरा से गोकुल नंदबाबा के पास पहुँचा दिया गया था। गोकुल में ही नंदबाबा और उनकी पत्नी यशोदा ने कृष्ण का पालन-पोषण किया। कृष्ण की प्रेयसी के रूप में प्रसिद्ध राधा वृषभानु गोप की पुत्री थीं। कृष्ण को गौड़ीय वैष्णव धर्मशास्त्र में अक्सर स्वयं भगवान के रूप में सन्दर्भित किया गया है और राधा एक युवा नारी हैं। एक गोपी जो कृष्ण की सर्वोच्च प्रेयसी हैं। कृष्ण के साथ राधा को सर्वोच्च देवी स्वीकार किया जाता है और यह कहा जाता है कि वह अपने प्रेम से कृष्ण को नियंत्रित करती हैं।

यह माना जाता है कि कृष्ण संसार को मोहित करते हैं, लेकिन राधा उन्हें भी मोहित कर लेती हैं। इसलिए वे सभी की सर्वोच्च देवी हैं। हालांकि भगवान के ऐसे रूप की पूजा करने के काफी आरंभिक सन्दर्भ मौजूद हैं, पर जब सन बारहवीं शताब्दी में जयदेव गोस्वामी ने प्रसिद्ध 'गीत गोविन्द' लिखा, तो दिव्य कृष्ण और उनकी भक्त राधा के बीच के आध्यात्मिक प्रेम सम्बन्ध के विषय को सम्पूर्ण भारतवर्ष में पूजा जाने लगा। यह माना जाता है कि कृष्ण ने राधा को खोजने के लिए रास नृत्य के चक्र को छोड़ दिया है। चैतन्य सम्प्रदाय का मानना है कि राधा के नाम और पहचान को भागवत पुराण में इस घटना का वर्णन करने वाले छंद में गुप्त भी रखा गया है और उजागर भी किया गया है। यह भी माना जाता है कि राधा मात्र एक चरवाहे की कन्या नहीं हैं, बल्कि सभी गोपियों या उन दिव्य व्यक्तित्वों का मूल हैं, जो रास नृत्य में भाग लेती हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

बाहरी कड़ियाँ

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=राधा-कृष्ण&oldid=603017" से लिया गया