प्रियव्रत  

प्रियव्रत मनु के सबसे बड़े पुत्र थे। मनु पुत्र प्रियव्रत को सारा राजपाट सौंप देना चाहते थे, लेकिन प्रियव्रत अपने ईष्ट देव की आराधना में ही लगे रहते थे। बाद के दिनों में उन्होंने पिता की बात को मान लिया और विवाह के लिए सहमत हो गये। प्रियव्रत ने अपनी पुत्री उर्जस्वती का विवाह दैत्य गुरु शुक्राचार्य के साथ किया था, जिसके फलस्वरूप देवयानी का जन्म हुआ।

विवाह

मनु के दूसरे पुत्र उत्तानपाद तथा तीन कन्याएँ आकूति, देवहुति और प्रसूति थीं। मनु अपने बड़े पुत्र को पृथ्वी का राज्य सौंपकर निश्चित होना चाहते थे। लेकिन प्रियव्रत अखण्ड समाधि-योग द्वारा विष्णु आराधना में मग्न थे। मनु और ब्रह्मा ने प्रियव्रत को समझाया। अनिच्छा होते हुए भी उन्हें मनु और ब्रह्मा की बात माननी पड़ी। विश्वकर्मा की पुत्री बर्हिष्मति से उसका विवाह हुआ, जिसने दस पुत्र और एक कन्या को जन्म दिया। दूसरी भार्या से प्रियव्रत ने तीन पुत्र प्राप्त किये।

संकल्प

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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