देवकी  

परिचय

कृष्ण-बलराम, देवकी-वसुदेव से मिलते हुए, द्वारा- राजा रवि वर्मा

आहुक ने अपनी बहिन आहुकी का ब्याह अवंती देश में किया था। आहुक की एक पुत्री भी थी, जिसने दो पुत्र उत्पन्न किये। उनके नाम हैं- देवक और उग्रसेन। वे दोनों देवकुमारों के समान तेजस्वी हैं। देवक के चार पुत्र हुए, जो देवताओं के समान सुन्दर और वीर हैं। उनके नाम हैं- देववान, उपदेव, सुदेव और देवरक्षक। उनके सात बहिनें थीं, जिनका ब्याह देवक ने वसुदेव के साथ कर दिया। उन सातों के नाम इस प्रकार हैं- देवकी, श्रुतदेवा, यशोदा, श्रुतिश्रवा, श्रीदेवा, उपदेवा और सुरूपा। उग्रसेन के नौ पुत्र हुए; उनमें कंस सबसे बड़ा था। शेष के नाम इस प्रकार हैं- न्यग्रोध, सुनामा, कंक, शंकु, सुभू, राष्ट्रपाल, बद्धमुष्टि और सुमुष्टिक। उनके पाँच बहिनें थीं- कंसा, कंसवती, सुरभी, राष्ट्रपाली और कंका। ये सब-की-सब बड़ी सुन्दरी थीं। इस प्रकार सन्तानों सहित उग्रसेन तक कुकुर-वंश का वर्णन किया गया।

छान्दोग्य उपनिषद में उल्लेख

देवकी- कृष्ण की माता का नाम देवकी तथा पिता का नाम वसुदेव है। देवकी कंस की बहन थी। कंस ने पति सहित उसको कारावास में बन्द कर रखा था, क्योंकि उसको ज्योतिषियों ने बताया था कि देवकी का कोई पुत्र ही उसका वध करेगा। कंस ने देवकी के सभी पुत्रों का वध किया, किन्तु जब कृष्ण उत्पन्न हुए तो वसुदेव रातों-रात उन्हें गोकुल ग्राम में नन्द-यशोदा के यहाँ छोड़ आये। देवकी के बारे में इससे अधिक कुछ विशेष वक्तव्य ज्ञात नहीं होता है। छान्दोग्य उपनिषद में भी देवकीपुत्र कृष्ण(घोर आगिंरस के शिष्य) का उल्लेख है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. सूरसागर, प0 (622-625
  2. सूरसागर0प0 627
  3. सूरसागर, प0 3708
  4. सूरसागर प0 3740

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