भारतीय दर्शन  

भारतीय दर्शन
भारतीय वेद
विवरण 'भारतीय दर्शन' का आरंभ वेदों से होता है। 'वेद' भारतीय धर्म, दर्शन, संस्कृति, साहित्य आदि सभी के मूल स्त्रोत हैं। आज भी धार्मिक और सांस्कृतिक कृत्यों के अवसर पर वेद-मंत्रों का गायन होता है। अनेक दर्शन-संप्रदाय वेदों को अपना आधार और प्रमाण मानते हैं।
भाषा संस्कृत
रचना काल वेदों का रचना काल बहुत विवादग्रस्त है। प्राय: पश्चिमी विद्वानों ने ऋग्वेद का रचना काल 1500 ई. पू. से लेकर 2500 ई. पू. तक माना है। इसके विपरीत भारतीय विद्वान् ज्योतिष आदि के प्रमाणों द्वारा ऋग्वेद का समय 3000 ई. पू. से लेकर 7500 वर्ष ई. पू. तक मानते हैं।
षड्दर्शन सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा, वेदांत
संबंधित लेख उपनिषद, वेद, उत्तर मीमांसा, पूर्व मीमांसा, ऋग्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, यजुर्वेद
अन्य जानकारी वैदिक और अवैदिक दर्शनों के अतिरिक्त भारतीय दर्शन परंपरा में एक तीसरी धारा शैव तथा शाक्त संप्रदायों की प्रवाहित होती रही है। ऋग्वेद और यजुर्वेद के रुद्र के रूप में शिव का वर्णन है।

भारतीय दर्शन भारतीय दर्शन का आरंभ वेदों से होता है। 'वेद' भारतीय धर्म, दर्शन, संस्कृति, साहित्य आदि सभी के मूल स्त्रोत हैं। अनेक दर्शन-संप्रदाय वेदों को अपना आधार और प्रमाण मानते हैं। प्राचीन काल में इतने विशाल और समृद्ध साहित्य के विकास में हज़ारों वर्ष लगे होंगे, इसमें कोई संदेह नहीं। उपलब्ध वैदिक साहित्य संपूर्ण वैदिक साहित्य का एक छोटा-सा अंश है। वैदिक साहित्य का विकास चार चरणों में हुआ है। ये 'संहिता', 'ब्राह्मण', 'आरण्यक' और 'उपनिषद' हैं।[1]

संस्कृति के मूल स्त्रोत

'वेद' भारतीय धर्म, दर्शन, संस्कृति, साहित्य आदि सभी के मूल स्त्रोत हैं। आधुनिक अर्थ में वेदों को हम दर्शन के ग्रंथ नहीं कह सकते। वे प्राचीन भारतवासियों के संगीतमय काव्य के संकलन है। उनमें उस समय के भारतीय जीवन के अनेक विषयों का समावेश है। वेदों के इन गीतों में अनेक प्रकार के दार्शनिक विचार भी मिलते हैं। चिंतन के इन्हीं बीजों से उत्तरकालीन दर्शनों की वनराजियाँ विकसित हुई हैं। अधिकांश भारतीय दर्शन वेदों को अपना आदि स्त्रोत मानते हैं। ये 'आस्तिक दर्शन' कहलाते हैं। प्रसिद्ध 'षड्दर्शन' इन्हीं के अंतर्गत हैं। जो दर्शन संप्रदाय अपने को वैदिक परंपरा से स्वतंत्र मानते हैं, वे भी कुछ सीमा तक वैदिक विचार धाराओं से प्रभावित हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 भारतीय दर्शन (हिन्दी) भारतखोज। अभिगमन तिथि: 19 सितम्बर, 2015।
  2. भौतिक तत्व
  3. 8 वीं शताब्दी
  4. 5 वीं शताब्दी
  5. 12 वीं शताब्दी
  6. संहिता, ब्राह्मण
  7. उपनिषदों
  8. 14वीं शताब्दी
  9. 14वीं शताब्दी
  10. उपनिषदों
  11. ऋक्, यज् तथा साम
  12. 'जन्माद्यस्य यत:' तथा 'आत्मकृते: परिणामात्।'-वेदांत दर्शन-सूत्र 1।1।2 1।4।26
  13. उत्तरोत्पादे च पूर्वनिरोधाम्। असति प्रतिज्ञोपरोधो योगपद्यमान्यथा।-वेदांत दर्शन- सूत्र 2।2।20।21
  14. शांकरभाष्य 3।2।22
  15. छांदोग्योपनिषद भाष्य-शंकर- 3।14।2
  16. शांकरभाष्य 2।1।23
  17. वृहदारण्यक उपनिषद भाष्य- शंकर- 2।4।12
  18. 9वीं शती
  19. इच्छा शक्ति: उमा कुमारी

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