गौतम धर्मसूत्र  

कर्त्ता
गौतम धर्मसूत्र के रचयिता ऋषि गौतम मुनि माने जाते हैं। गौतम नाम का उल्लेख प्राचीन शास्त्रों में अनेकत्र पाया जाता है। यथा न्याय दर्शन के प्रणेता भी अक्षपाद गौतम माने जाते हैं। कठोपनिषद में गौतम का प्रयोग नचिकेता तथा उसके पिता वाजश्रवस् के लिए हुआ है। इसी प्रकार छान्दोग्य उपनिषद[1] में हारिद्रुम नाम के आचार्य का उल्लेख हुआ है। अथर्ववेद[2] में भी गौतम नाम है। ऋग्वेद[3] के ऋषि रहूगण गौतम हैं। इनमें से किसने धर्मसूत्र का प्रणयन किया है, यह अनिश्चित है। चरणव्यूह की टीका के अनुसार गौतम सामवेद की राणायनी शाखा के एक विभाग के आचार्य थे।[4]

गौतम धर्मसूत्र का स्वरूप

गौतम धर्मसूत्र में केवल तीन प्रश्न हैं। प्रथम तथा द्वितीय प्रश्न में नौ–नौ अध्याय तथा तृतीय प्रश्न में दस अध्याय हैं। इस प्रकार सम्पूर्ण गौतम धर्मसूत्र 28 अध्यायों में विभक्त है, जिसमें एक सहस्त्र सूत्र है। यह ग्रंथ केवल गद्य में है तथा सभी धर्मसूत्रों में प्राचीनतम है। इस ग्रंथ में वेदों के मन्त्रांशों को सूत्र रूप में उद्धृत किया गया है। यद्यपि इन सूत्रों में यजुर्वेद के मन्त्र भी उद्धृत हैं[5] तथापि इस ग्रंथ का सम्बन्ध सामवेद से माना जाता है, क्योंकि इसमें न केवल सामवेद के अनेक विषयों को ही ग्रहण कर लिया गया है, अपितु सामवेद के कई सूक्तों का निर्देश भी है। साथ ही इस ग्रंथ के तृतीय प्रश्न के अष्टम अध्याय में अनेक सूत्र सामवेद के सामविधान ब्राह्मण से उद्धृत है। इसी प्रकार तृतीय प्रश्नपत्र के प्रथम अध्याय के बारहवें सूत्र में सामवेद के नौ मन्त्रों का निर्देश है। प्रथम प्रश्न के प्रथम अध्याय के सूत्र 52वें तथा तृतीय प्रश्न के सप्तम अध्याय के 8वें सूत्र में पाँच महाव्याहृतियों का उल्लेख किया गया है।[6] इन व्याहृतियों का सम्बन्ध भी सामवेद से ही है। इन प्रमाणों के आधार पर गौतम धर्मसूत्र का सम्बन्ध सामवेद से स्पष्ट है। म. म. काणे ने गौतम धर्मसूत्र का सम्बन्ध गौतमकल्प से माना है, किन्तु साथ ही उन्होंने इसकी स्वतन्त्र रचना का मत भी प्रतिपादित किया है।[7]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. छान्दोग्य उपनिषद, 4.4–3
  2. अथर्ववेद , 4.29.6 तथा 18.3.16
  3. ऋग्वेद , 1.78.5
  4. गौतम धर्मसूत्र, चौखम्बा 1966, भूमिका, पृ. 13
  5. 1-अग्नये स्वाहा, सोमाय स्वाहा – गौतम धर्मसूत्र 3816 तथा यजु. 22.6।
    2-आपो हिष्ठा. – गौतम धर्मसूत्र 3.8 तथा यजु. 11.50।
  6. 1-गौतम धर्मसूत्र 1.1.51।
    2-गौतम धर्मसूत्र 3.8.7।
  7. हि. ध. शा. भाग 1 पृष्ठ 13
  8. बौधायन धर्मसूत्र 2.2.4.17
  9. तदलाभे क्षत्रवृत्तिः– गौतम धर्मसूत्र 1.7.6
  10. गौतम धर्मसूत्र 1–45 पर कुमारिल भट्ट का मत
  11. गौतम धर्मसूत्र, 3–3–7
  12. त्रीणि प्रथमान्यनिर्दिश्यान्मनुः – गौतम धर्मसूत्र 3.3–7
  13. वेदमित्र, इण्डिया ऑफ धर्मसूत्राज भूमिका, पृ. 36
  14. गौतम धर्मसूत्र, 1–8–5
  15. गौतम धर्मसूत्र, 1.8.6
  16. गौतम धर्मसूत्र, 3.1.12
  17. त्रय्यामान्वीक्ष्यां वाऽभिविनीतः गौतम धर्मसूत्र 2–2.3
  18. निरूक्त, 11.3
  19. गौतम धर्मसूत्र 2.2.28 दण्डो दमनादित्याहुस्तेनादान्तान्दमयेत्
  20. बौधायन धर्मसूत्र 1.1.7 तथा 2.2.17
  21. श्रौतसूत्र लाट्यायन, 1.3.3 तथा 1.4.17
  22. द्राह्यायण, 1.4.17 तथा 9.3.15
  23. गोभिलगृह्यसूत्र, 3.10.6
  24. वसिष्ठ धर्मसूत्र, 4.34 तथा 4.36
  25. मनुस्मृति, 2.16
  26. याज्ञवल्क्य–स्मृति 1.5
  27. वेदान्तसूत्र–भाष्य 3.1.8
  28. गौतम धर्मसूत्र 2.2.29
  29. बौधायन धर्मसूत्र 2.2–17
  30. इण्डियन ला एण्ड कस्टम पृ. 9
  31. गौतम धर्मसूत्र 1.3–28
  32. पंचानां यज्ञानामनुष्ठानं देवपितृमनुष्यभूतब्राह्मणम् –गौतम धर्मसूत्र 1.8.17
  33. दया सर्वभूतेषु क्षान्तिरनसूया शौचमनायासो मंगलमकार्पण्यमस्पृहेति –गौतम धर्मसूत्र 1–8–24
  34. गौतम धर्मसूत्र, 1–5–18
  35. गौतम धर्मसूत्र 1–3–7
  36. 2.3.36
  37. गौतम धर्मसूत्र 2.1.7–8
  38. गौतम धर्मसूत्र 2.20.14

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