अज्ञेयवाद  

अज्ञेयवाद 'ज्ञान मीमांसा' का विषय है, यद्यपि उसका कई पद्धतियों में 'तत्व दर्शन' से भी संबंध जोड़ दिया गया है। इस सिद्धांत की मान्यता है कि जहाँ विश्व की कुछ वस्तुओं का निश्चयात्मक ज्ञान संभव है, वहाँ कुछ ऐसे तत्व या पदार्थ भी हैं, जो अज्ञेय हैं, अर्थात् जिनका निश्चयात्मक ज्ञान संभव नहीं है।

भिन्नता

'अज्ञेयवाद' 'संदेहवाद' से भिन्न है; 'संदेहवाद' या 'संशयवाद' के अनुसार विश्व के किसी भी पदार्थ का निश्चयात्मक ज्ञान संभव नहीं है। 'भारतीय दर्शन' के संभवत किसी भी संप्रदाय को अज्ञेयवादी नहीं कहा जा सकता। वस्तुत भारत में कभी भी संदेहवाद एवं अज्ञेयवाद का व्यवस्थित प्रतिपादन नहीं हुआ। नैयायिक सर्वज्ञेयवादी हैं, और नागार्जुन तथा श्रीहर्ष जेसे मुक्तिवादी भी पारिश्रमिक अर्थ में 'संशयवादी' अथवा 'अज्ञेयवादी' नहीं कहे जा सकते।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. अज्ञेयवाद (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 31 जनवरी, 2014।
  2. फिनामिनल वर्ल्ड
  3. कैटेगीरीज ऑव अंडरस्टैंडिंग
  4. पाजिटिविज्म
  5. अन्कंडिशंड

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=अज्ञेयवाद&oldid=612337" से लिया गया